दिल्ली के साकेत की रहनी वाली एक युवती पाइोजेनिक स्पोंडिलोडिसिटिस नामक एक गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। इसमें उसकी रीढ़ की हड्डी का एक हिस्सा नष्ट हो गया था। वह न तो ठीक से खड़ी हो पाती थी और न ही दैनिक कार्यों को कर पाती थी। इंडियन स्पाइनल इंडरीज सेंटर के डॉक्टरों ने युवती की इस बीमारी को सर्जरी कर ठीक किया और उसे नया जीवन दिया है।
इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर स्पाइन सर्जरी विभाग के डॉ. गुरुराज संगोदिमठ ने बताया कि जब युवती उनके पास आई थी तो स्थिति गंभीर थी। जांच करने पर पता चला कि पैथोजन स्यूडोमोनास के कारण संक्रमण ने खून के प्रवाह को बाधित कर दिया था और हड्डी की कोशिकाओं को नष्ट कर दिया था, जिससे यह बीमारी हो गई थी।
इससे युवती का सिर उसके बाजू और सामने झुक गया। गले में हुआ संक्रमण खून के जरिए हड्डियों तक फ़ैल गया था। ऐसे में मरीज की सर्जरी करना जरूरी हो गया था। सर्जरी के दौरान काफी सावधानी बरती गई। 2 घंटे की सर्जरी के बाद युवती अब अपनी दिनचर्या की सभी चीजें भी करने में भी सक्षम हो गई। उसे अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है।
डॉक्टर गुरुराज ने बताया कि लोगों को गंभीर दर्द के लक्षणों और संकेतों को लेकर बहुत सावधान रहना चाहिए। इसके अलावा कमजोरी, रात में ज्यादा दर्द होना, वजन कम होने पर सावधान हो जाना चाहिए।
इंडोनेशिया से आई बच्ची का लिवर प्रत्यारोपित
बच्ची का लिवर प्रत्यारोपित
- फोटो : अमर उजाला
इंडोनेशिया से आई एक बच्ची का दिल्ली के अपोलो अस्पताल में लीवर प्रत्यारोपित किया गया है। बच्ची अंतिम अवस्था में लिवर रोग ( बाइलरी आट्रेसिया) से पीड़ित थी। इसके कारण उसके पेट में सूजन आ गई थी। 9 माह की उम्र में ही उसका वजन 6.6 किलो हो गया था। अस्पताल के डॉक्टरों ने सर्जरी करके बच्ची को नया जीवन दिया है।
अस्पताल के निदेशक डॉक्टर अनुपम सिब्बल ने बताया कि शुरूआती महीनों में बच्ची का उसके देश में ही उसका उपचार किया गया, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती चली गई, जिसके बाद उसे लिवर प्रत्यारोपण के लिए भारत भेज दिया गया।
बच्ची को जब अपोलो में भर्ती किया गया, उस समय उसके पेट में सूजन थी, जॉन्डिस बढ़ता चला जा रहा था और लिवर में घाव हो गए थे। 9 माह की उम्र में उसका वजन 6.6 किलो था और उसके पेट में 1.5 लीटर पानी भरा था। पहले सर्जरी करके यह समस्या ठीक की गई। उसके बाद प्रत्यारोपण किया गया। बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ है।