इस तरह से तो जंगल कम होते जाएंगे। लकड़ी से जब कोई दाह संस्कार होता है, तो उससे वायु प्रदूषण भी होता है। दो साल पहले गोबर लॉग्स का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को प्रेरित किया था। अब कई जगहों पर इसका इस्तेमाल किया जाने लगा है।
अर्थ प्रोजेक्ट पर काम कर रहे छात्रों में नमन, यश, मौलिक, अमन, रितिक, आशिता, मुदित और अमित का कहना है कि एक किलोग्राम का गाबर लॉग्स तैयार करने में आठ रुपये लगते हैं। होलिका दहन के लिए करीब सौ किलो लॉग्स की जरूरत होती है। ये लॉग्स पूरी तरह इकोफ्रेंडली होते हैं।
दिल्ली में आठ जगहों पर स्थित गौशालाओं में ये लॉग्स बनाए जा रहे हैं। अभी तक करीब 5000 किलो गोबर लॉग्स बनाने का ऑर्डर मिला है। साथ ही दिल्ली के अलावा भोपाल में भी सौ टन लॉग्स बनाए जा रहे हैं। इनके अलावा उड़ीसा, गोवा और दूसरे कई राज्यों में भी काऊ डंग लॉग्स का इस्तेमाल करने के लिए विभिन्न संगठनों से संपर्क किया गया है।