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अगर डीयू बिल्कुल साफ है तो न्यायिक आदेश से डर क्यों रहा है: हाईकोर्ट

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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूछा कि अगर आप बिल्कुल साफ हैं तो शिकायत निवारण समिति के पुनर्गठन के न्यायिक आदेश से खतरा क्यों महसूस हो रहा है। पीठ ने कहा कि यूनिवर्सिटी इस समिति को बनाने के एकल पीठ के आदेश को चुनौती क्यों दे रही है, जबकि यह फैसला छात्रों की शिकायतों के निवारण के लिए लिया गया है।
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न्यायमूर्ति हिमा कोहली और सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने डीयू की ओर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि डीयू प्रशासन को शिकायत निवारण समिति बनाने में बाहरी लोगों को शामिल करने से डर क्यों लग रहा है। पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर आप इतने साफ हैं तो आपको डर क्यों लग रहा है और आप इसे व्यक्तिगत रूप से क्यों देख रहे हैं। समिति सिर्फ छात्रों की शिकायतों का निवारण करेगी।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने सात अगस्त को ओबीई परीक्षा से जुड़ी शिकायतों के निवारण के लिए समिति के पुनर्गठन का आदेश दिया था। इस समिति में पांच लोगों को शामिल किया गया था, जिनमें समिति के अध्यक्ष के रूप में हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी, दो वकीलों और दो शिक्षाविदों को शामिल किया गया था।
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एकल पीठ के आदेश का विरोध करते हुए डीयू की ओर से अनुरोध किया गया कि समिति में किसी भी बाहरी सदस्य को शामिल न किया जाए। डीयू प्रशासन ने सुझाव दिया कि पुरानी चार सदस्यीय शिकायत निवारण समिति को बरकरार रखा जाए और इसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति को दी जाए, लेकिन पीठ ने इस सुझाव को मानने से इंकार दिया।
इसके बाद डीयू प्रशासन ने मांग की कि समिति के पुराने सदस्यों में से एक को नई समिति में शामिल किया जाए। इसके बाद पीठ ने सात अगस्त के आदेश में संशोधन करते हुए समिति में एक सदस्य प्रोफेसर एससी राय को भी शामिल कर दिया। इसके साथ ही पीठ ने इस याचिका का निपटारा कर दिया।
वहीं दूसरी ओर शिकायत निवारण समिति की ओर से डीयू प्रशासन के खिलाफ न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह के समक्ष दायर याचिका पर सुनवाई हुई। इस याचिका में आरोप लगाया गया कि समिति के संचालन में डीयू प्रशासन सहयोग नहीं कर रहा है। इस पर कोर्ट ने डीयू प्रशासन को फटकार लगाई और इस बारे में पूछा।
डीयू प्रशासन ने कोर्ट से कहा कि वह सात अगस्त के आदेश का पालन करेगा। पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि छात्रों की शिकायतों के निवारण के लिए आदेश का पालन ठीक ढंग से किया जाए।
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