कोरोना से जंग के बीच देशव्यापी लॉकडाउन के कारण पूरे देश की रफ्तार थमी हुई है। इस वजह से सभी उद्योग भी पूरी तरह से ठप पड़े हैं। आइसक्रीम उद्योग को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा है। लॉकडाउन के कारण केवल दिल्ली में ही आइसक्रीम उद्योग को 500 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लग चुकी है।
एक आइसक्रीम कंपनी के प्रोपराइटर पुनीत राणा ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से ही प्लांट पूरी तरह से बंद हैं। गर्मी के केवल चार महीने ही आइसक्रीम उद्योग के कमाई के होते हैं। इसमें भी मार्च से ही आइसक्रीम का अधिक उत्पादन शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि आइसक्रीम कंपनियों के दिल्ली में विभिन्न वितरण केंद्र बने होते हैं, जहां से फुटकर के अलावा हॉटल व रेस्तरां में थोक में आइसक्रीम जाती है।
एक वितरण केंद्र से कंपनी को प्रतिमाह 70 लाख रुपये की कमाई होती है, लेकिन लॉकडाउन के कारण दिल्ली के सभी रेस्तरां, हॉटल व रेहड़ियां पूरी तरह से बंद हैं। अप्रैल माह में शादियां भी अधिक होती हैं, इस वजह से भी आइसक्रीम की सेल में बढ़ोतरी होती है, लेकिन कोरोना की वजह से 500 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार ठप हुआ है।
डीप फ्रीजर में जमा हैं आइसक्रीम, बढ़ रहा बिजली बिल का बोझ
फिलहाल, आइसक्रीम का उत्पादन पूरी तरह बंद है, लेकिन जो आइसक्रीम मार्च में बनी थीं, उनको डीप फ्रिज में रखा गया है। आइसक्रीम संचालकों का कहना है कि आइसक्रीम की वैद्यता एक साल तक रहती है। ऐसे में आइसक्रीम को डीप फ्रिज में रखा गया है। हालांकि, कमाई न होने की वजह से डीप फ्रिज के बिजली के बिल का दबाव बन रहा है। वहीं, कर्मचारियों को भी पैसा देना मुश्किल होता चला जा रहा है। हालांकि, कुछ आइसक्रीम कंपनियों ने कर्मचारियों को निकालना भी शुरू कर दिया है।