मशहूर पत्रिका ‘टाइम’ ने 2020 की जिन 100 सबसे ज्यादा प्रभावशाली लोगों की सूची छापी है, उसमें दिल्ली के चर्चित शाहीन बाग धरने का प्रमुख चेहरा रहीं बिलकीस दादी भी शामिल हैं। इस सम्मान पाने के बाद बिलकीस दादी ने टाइम मैगजीन का शुक्रिया अदा किया है। उनका कहना है कि वह मरते दम तक नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध करती रहेंगी।
उन्होंने कहा कि जिस कानून के विरोध में वह धरने पर बैैठी थी, आज दुनिया ने शाहीन बाग का सजदा किया है। यूपी के हापुड़ जिले में अपने रिश्तेदार के घर गईं बिलकीस ने कहा कि वह अब भी मोदी सरकार से सीएए को वापस लेने की अपील करती हूं। उन्होंने कहा कि हम शांतिप्रिय लोग हैं, इसलिए कोरोना संकट आने के बाद ही खुद प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला लिया।
एनआरसी-सीएए के विरोध का प्रमुख चेहरा बनकर उभरीं
एनआरसी-सीएए विरोध का चेहरा बनकर उभरीं बिलकीस यूपी के बुलंदशहर की रहने वाली हैं। उनके पति की करीब ग्यारह साल पहले मौत हो चुुकी थी। वह फिलहाल शाहीन बाग में अपने बहू-बेटों और पोते-पोतियों के साथ रहती हैं। शाहीन बाग प्रदर्शन में दादी के नाम से मशहूर हुईं बिलकीस ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में नारा दिया था कि , जब तक रगों में खून बह रहा है, तब तक यहीं बैठी रहूंगी। उनके साथ दो दादी और भी थी, जो हर वक्त प्रदर्शन में साथ रहती थी।
ट्विटर पर 'शाहीन बाग' हो रहा ट्रेंड
टाइम मैगजीन की तरफ से सूची जारी होने के बाद ट्विटर पर ‘शाहीन बाग’ ट्रेंड करने लगा। यूजर्स ने लिखा कि इस उम्र में बिलकीस दादी के संघर्ष का जज्बा काबिले तारीफ है। हर तरफ उन्हें बधाइयों की झड़ी लग गई। एक यूजर्स ने लिखा कि हमारे देश की दादी किसी से कम है क्या।
101 दिन चला था प्रदर्शन
नागरिकाता संशोधन कानून के विरोध में शाहीन बाग में धरना-प्रदर्शन लगभग 101 दिन तक चला था। 2019 दिसंबर से शुरू हुआ यह प्रदर्शन 24 मार्च 2020 तक चला था। वहां टेंट लगाकर महिलाएं दिन-रात धरने पर बैठी थीं। दिल्ली में कोरोना के प्रकोप बढऩे के बाद पुलिस ने एहतियातन शाहीन बाग में प्रदर्शन स्थल को खाली करवा दिया था।