भद्रा काल का साया हटते ही दिल्ली के लोगों ने बृहस्पतिवार रात होलिका दहन किया। उससे पहले दिन में राजधानी के अलग अलग इलाकों में होलिका पूजन होता दिखाई दिया। घर से रोली, चावल, गुजिया और जल के साथ होलिका तक पहुंचीं महिलाओं ने पहले पूजन किया और फिर भोग इत्यादि लगाने के बाद अपने घर पर जाकर पकवान इत्यादि बनाए।
रात में भद्रा काल समाप्त होने के बाद राजधानी में होलिका दहन शुरू हुआ। पूर्वी से लेकर पश्चिम और उत्तर से लेकर दक्षिणी जिलों में होलिका दहन के बाद लोगों ने एक दूसरे को गले लगकर होली पर्व की बधाईयां दी। शुक्रवार को होली के साथ साथ राजधानी में शब-ए-बारात भी है। यह संयोग सालों बाद कभी-कभार ही देखने को मिलता है। इसलिए दिल्ली पुलिस ने भी होली और शब-ए-बारात पर हुड़दंग न मचाते हुए लोगों से शांति-सौहार्द के साथ त्योहार मनाने की अपील की है।
बीते दो वर्षों से होली पर्व के बाद ही कोरोना के मामले बढ़े हैं। ऐसे में सरकार ने लोगों से अपील की है कि कोरोना के मामले नियंत्रण में आने के बाद भी लोगों को लापरवाही नहीं बरतनी है। बाजारों में भीड़ से दूरी बनाए रखना है। साथ ही घरों में रहकर होली पर्व मनाया जाए। ताकि हर किसी का संक्रमण से बचाव हो सके। इसके अलावा मौसम में बदलाव भी लोगों को बीमार कर सकता है।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से गोल्ड मेडलिस्ट और दिल्ली के लक्ष्मी नगर निवासी पंडित अंबरीष कुमार शास्त्री ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर एक बजकर 30 मिनट पर पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हुई। यह शुक्रवार दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। चूंकि प्रदोष काल में पूर्णिमा होने से होलिका पर्व मनाया जाता है लेकिन इस बार भद्रा काल भी है।