फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi News: राष्ट्रद्रोह याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, याचिकाकर्ता को दी चेतावनी

विज्ञापन
विज्ञापन
- अधिवक्ता ने देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की सजा से संबंधित प्रावधानों को चुनौती दी थी
विज्ञापन

- कोर्ट ने कहा एक ही जैसी याचिकाएं दाखिल करने पर उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की सजा से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता उपेंद्र नाथ दलाई को बार-बार एक ही याचिका दाखिल करने के लिए चेतावनी दी और उन पर जुर्माना लगाने पर विचार करने की बात कही।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेदेला की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पहले भी ऐसी याचिकाएं दाखिल की थीं, जिन्हें हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पुलवामा आतंकी हमले का जिक्र करने के लिए भी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा, हम आपको चेतावनी दे रहे हैं! आपने जो याचिका दाखिल की है, उसका तरीका ठीक नहीं है। पहले आप रिट याचिका दाखिल करते हैं, फिर समीक्षा मांगते हैं और फिर दूसरी याचिका... केवल प्रार्थना के शब्द बदलने से आप नई याचिका दाखिल नहीं कर सकते।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट सार्वजनिक बहस का मंच नहीं
कोर्ट ने कहा कि याचिका में की गई दलीलें कोर्ट के लिए उपयुक्त मंच नहीं हैं। यह सार्वजनिक बहस का मंच नहीं है। आप एक कानूनी अदालत में हैं, और आपको यह समझना होगा। आपकी दलीलें कहीं और के लिए हैं। हमने आपको वकील और वरिष्ठ वकील की मदद दी, जो आपकी भाषा (उड़िया) में बात कर सकता था। दलाई ने बीएनएस की धारा 147 से 158 को चुनौती दी थी, जो देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और राज्य के कैदी या युद्धबंदी को भगाने में सहायता, बचाव या आश्रय देने की सजा से संबंधित हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें