नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने मस्कुलर डायोस्ट्रॉफी बीमारी से जूझ रहे दो भाई-बहन रोजलिनी परिदा और राकेश कुमार परिदा की जांच रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार से उनके इलाज के मुद्दे पर जवाब मांगा है। अदालत के आदेश पर गठित मेडिकल टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि है कि दोनों को उचित चिकित्सा की जरूरत है और वे स्वयं कुछ भी काम करने में असमर्थ हैं।
न्यायमूर्ति प्रतिभा मनिंदर सिंह ने साथ ही केंद्र व दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वे वर्तमान मामले में याचिकाकर्ताओं की तरह उच्च सहायता की आवश्यकता वाले दिव्यांगों को प्रदान किए जाने वाले लाभ, सुविधाओं और योजनाओं की जानकारी दें। अदालत ने दोनों को उचित चिकित्सा भी प्रदान करने को कहा है।
अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के जरिये दायर याचिका में उन्होंने अपने इलाज व देखभाल करने के साथ-साथ चलने फिरने में सहयोग करने वाले उपकरण, सहयोगी एवं रहने के लिए मकान दिलवाने का आग्रह किया है। बचपन में ही उनके पिता का देहांत हो गया था और उनकी मां घरों में काम करके उनको पाल रही है। दोनों इस तरह से दिव्यांग हो गए हैं कि अपना काम भी नहीं कर पाते और उनकी सहायता मां करती है।
अग्रवाल ने अदालत को बताया कि ऐसे में केंद्र व दिल्ली सरकार को निर्देश दिया जाए कि उन दोनों को उपयुक्त सहायता मुहैया कराए। उन्होंने कहा कि भाई बहन रोजलिनी परिदा एवं राकेश कुमार परिदा ग्रेजुएट हैं। बहन बायोलॉजी में ग्रेजुएट है, जबकि भाई फिजिक्स में ग्रेजुएट है, लेकिन वह इस लायक नहीं है कि चल फिर सकें और नौकरी करके अपनी आजीविका चला सकें।
उन्होंने कहा हर काम में मां की सहायता की जरूरत है और वर्तमान में वह भी बुजुर्ग हो चुकी है। इसलिए सरकार को निर्देश दिया जाए कि उन लोग की जीन थेरेपी या जो भी उपयुक्त इलाज हो कराएं।