नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को 31 मार्च तक अनुवांशिक और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों के निशुल्क इलाज के लिए नई नीति को मंजूरी देने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने सरकार को उस पोर्टल को भी शुरू करने का निर्देश दिया है जिसके तहत दुर्लभ बीमारियों से पीड़ितों के इलाज के लिए महंगी दवाइयों के लिए क्राउड फंडिंग यानी चंदा जुटाना है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह ने सरकार की ओर से दाखिल जवाब पर विचार करते हुए यह आदेश दिया है। सरकार ने न्यायालय को बताया कि अनुवांशिक और दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए राष्ट्रीय नीति-2020 के मसौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
सरकार की ओर से कहा गया कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री से मंजूरी के बाद इसे सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य हित धारकों के साथ साझा किया गया ताकि सुझाव व आपत्ति पर विचार किया जा सके। स्वास्थ्य मंत्रालय के अवर सचिव की ओर से दाखिल हलफनामा में कहा गया है कि कोरोना महामारी के कारण नीति को अंतिम रूप देने में देरी हुई है।
केंद्र सरकार ने भरोसा जताया है कि 31 मार्च, 2021 तक इस नीति को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। सरकार ने कहा है कि सरकार ने दुर्लभ और अनुवांशिक बीमारियें से पीड़ितों के इलाज के लिए राष्ट्रीय नीति को 2017 में लागू किया था लेकिन इसे लागू करने में हो रही परेशानियों को देखते हुए नई नीति बनने तक प्रभावहीन कर दिया गया।
सरकार ने यह जवाब 12 साल के केशव शर्मा व अन्य मरीजों के निशुल्क इलाज की मांग को लेकर अधिवक्ता अशोक अग्रवाल द्वारा दाखिल याचिका के जवाब में पेश किया है। सरकार ने कहा है कि दुर्लभ बीमारी से पीड़ित याचिकाकर्ता का इलाज क्राउड फंडिंग यानी चंदा जुटाकर करने की संभावना पर विचार कर रही है। इसके लिए एक पोर्टल शुरू किया जा रहा है जिसके जरिये निजी व्यक्ति और कंपनियों से चंदा जुटाने का प्रयास होगा।