नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने राजधानी में रैन बसेरों में रहने वाले हजारों बेघरों को तीन वक्त का पौष्टिक खाना मुहैया कराने व वैक्सीन लगाने की मांग मुद्देेे पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। न्यायालय ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने मामले में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग के अलावा दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को इस मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 4 जून तय की है। पीठ ने यह आदेश बंधुआ मुक्ति मोर्चा की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है।
याची ने कहा कि राजधानी में कोरोना लॉकडाउन के कारण रैन बसेरों में रहने वाले लोग का रोजगार छीन गया है। वे अपने खाने भर की भी कमाई नहीं कर पा रहे हैं। याचिकाकर्ता संगठन ने याचिका में उच्च न्यायालय से दिल्ली सरकार और आश्रय सुधार बोर्ड को सभी बेघरों को तीन वक्त का पौष्टिक खाना (नाश्ता, दोपहर और रात्रि का खाना) मुहैया कराने का आदेश देने की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि आश्रय सुधार बोर्ड ने पिछले साल 5 अक्तूबर को बेघरों को तीन वक्त का खाना देने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि सरकार फिलहाल बेघरों को दो वक्त का खाना दे रही है। इसलिए सरकार को तीन वक्त का खाना मुहैया कराने का आदेश दिया जाए।
दिल्ली सरकार के अधिवक्ता संतोष त्रिपाठी ने पीठ को बताया कि रैन बसेरों में रहने वाले लोगों को खाना व अन्य जरूरी सामान मुहैया करवाया जा रहा है।
याची ने कहा कि राजधानी ही नहीं पूरे देश में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं और गरीब लोगों वैक्सीन से वंचित हैं। ऐसे में सरकार को रैन बसेरों में रहने वाले लोगों को टीका लगाने के लिए कैंप लगाने का निर्देश दिया जाए। यदि कोई संक्रमित मिलता है तो उसके लिए पिछले साल की तरह अलग से क्वारंटाइन सेंटर बनाने का आदेश देने की भी मांग की है।