नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में बाल श्रम एवं बंधुआ मजदूरी से मुक्त करवाए गए 16 और बच्चों के मामले में केंद्रीय श्रम मंत्रालय और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में इन सभी के पुनर्वास के लिए तत्काल वित्तीय सहायता देने का अनुरोध किया गया है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने सरकार को याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार कर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 19 मार्च तय की है। अदालत में बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी से मुक्त करवाए गए 88 बच्चों के पुनर्वास का मामला पहले ही लंबित है।
मुक्त कराए गए एक बच्चे के पिता ने यह याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ता मोहम्मद कादिर अंसारी ने बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी के शिकार बच्चों के लिए राहत उपायों के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया है। इसमें उन्होंने अपने नाबालिग बेटे का भी जिक्र किया है जो काम की तलाश में 12 साल की उम्र में बिहार से दिल्ली आया था।
वकील निमिषा मेनन, कृति अवस्थी और शिवांगी यादव द्वारा यह याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि बच्चे को ऐसी जगह काम पर रखा गया जहां दो महीने से अधिक समय तक नौकरी पर रखने वाले मालिक के हाथों उसे उत्पीड़न और अमानवीय बर्ताव का सामना करना पड़ा। उसे दिन में 14 से अधिक घंटे तक काम करना पड़ता था और बहुत कम वेतन दिया जाता था।
अंसारी ने अपने बच्चे एवं अन्य को केंद्रीय क्षेत्र योजना (सीएस योजना) 2016 के तहत पुनर्वास के संबंध में वित्तीय सहायता नहीं मिलने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है।