न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने निगमायुक्त को निर्देश दिया कि वे उन संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करें, जिन्हें क्षेत्र की निगरानी करनी चाहिए थी और जिन्होंने इन अवैध, अनधिकृत निर्माणों को करने की अनुमति दी।
हाईकोर्ट ने आदेश का उल्लंघन कर दक्षिणी दिल्ली के कुतुबमीनार के पास अवैध निर्माण के आरोप को गंभीरता से लिया है। अदालत ने दक्षिणी दिल्ली नगर निगम को इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं अदालत ने नगर निगम आयुक्त (साउथ जोन) को मामले में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने का निर्देश देते हुए उन्हें अगली सुनवाई में पेश होने को कहा है।
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न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने निगमायुक्त को निर्देश दिया कि वे उन संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करें, जिन्हें क्षेत्र की निगरानी करनी चाहिए थी और जिन्होंने इन अवैध, अनधिकृत निर्माणों को करने की अनुमति दी। अदालत ने निगमायुक्त को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि जो बिल्डिंग बन चुकी है, लेकिन खाली है उनमें कोई भी व्यक्ति दाखिल न हो सके।
अदालत ने याची के उस तर्क को गंभीरता से लिया कि नगर निगम ने अवैध निर्माण हटाने की जो रिपोर्ट दी है वह ठीक नहीं है, क्योंकि तोडफोड़ मात्र दिखावे के रूप में की गई है। अदालत ने निगामयुक्त को इलाके की फोटो सहित विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 20 अगस्त तय की है।
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अदालत रींकू कौशिक द्वारा वर्ष 2018 में दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची ने आरोप लगाया है कि कुतुब मीनार से सटी सरकारी भूमि पर विशाल स्तर पर अवैध और अनधिकृत कॉलोनी विकसित की जा रही है। इतना ही नहीं वहां छह मंजिला और उससे अधिक ऊंचाई वाली इमारतों का निर्माण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा अदालत के बार-बार निर्देशों के बावजूद एमसीडी के अधिकारियों ने अवैध, अनधिकृत निर्माण करने और भवनों को पूरा करने की अनुमति दी है। याचिका में कुतुबमीनार के पास एक इमारत के निर्माण की अनुमति देने में बिल्डरों, राजनेताओं, पुलिस अधिकारियों, नगर निगम के अधिकारियों और अन्य स्थानीय निकायों के बीच गठजोड़ और फ्लैटों के बेचने का भी आरोप लगाया गया है।