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हाईकोर्ट ने रेमडेसिविर दवा के निर्यात पर किया सवाल

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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल किए जाने वाले रेमडेसिविर दवा के निर्यात पर सवाल उठाते हुए कहा कि भले ही दवा की लाखों शीशियों को भारत ने निर्यात किया हो, लेकिन उसके अपने नागरिक दवा की भारी कमी से जूझ रहे हैं।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने सुनवाई करते हुए कहा कि भारत में कई कंपनियां दवा का निर्माण कर रही हैं। दवा की लाखों शीशियों का निर्यात किया गया होगा, लेकिन हमारे पास अपने रोगियों की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार नहीं है।
अदालत ने कहा, आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में दवा की कमी गंभीर है। अदालत ने केंद्र, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से पूछा कि क्या कमी को दूर करने के लिए रेमडेसिविर के संबंध में दिशा-निर्देशों में कोई बदलाव किया गया है।
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कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि वह किस आधार पर यह तय कर रहा है कि दिल्ली सरकार को कितनी दवा आवंटित की जानी है। क्या कोई दवा खरीदने के लिए सीधे निर्माता या आपूर्तिकर्ता से संपर्क कर सकता है। अदालत ने यह निर्देश एक वकील की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याची कोविड से पीड़ित है और उसे आवश्यक रेमडेसिविर की छह खुराकों में से केवल तीन ही प्राप्त हुई हैं।
अदालत ने दिल्ली सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि याची को दवा की शेष खुराक उपलब्ध करवाई जाएं। अदालत ने मामले की सुनवाई बुधवार को भी तय की है। इससे पूर्व अदालत ने सरकार के उस तर्क पर हैरानी जताई थी कि उक्त दवा मात्र अस्पतालों में ही प्रदान की जा सकती है। अदालत ने कहा जब कोरोना वायरस रोगियों के लिए अस्पतालों में ऑक्सीजन और बिस्तर उपलब्ध नहीं है, तो फिर उन्हें दवा कैसे मिलेगी।
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