नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने शिक्षकों के 12165 रिक्त पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी न करने पर दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) को फटकार लगाई है। अदालत ने डीएसएसएसबी के चेयरमैन को नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर जवाब तलब किया है। इसके अलावा अदालत ने दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय से प्रधानाचार्यों के 77 प्रतिशत रिक्त पदों को न भरने पर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा यह गंभीर मामला है कि दिल्ली सरकार के आग्रह के बावजूद डीएसएसएसबी ने 12,165 शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी नहीं किया। अदालत ने उन्हें स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि आदेश पर अमल क्यों नहीं किया गया।
अदालत ने दिल्ली सरकार द्वारा प्रधानाचार्य के पदों को न भरने पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि कुल 745 प्रधानाचार्य के पदों में से मात्र 215 पर ही नियुक्तियां हैं। इनमें से भी 50 प्रधानाचार्य अपने कार्य की अपेक्षा कहीं अन्य ड्यूटी दे रहे हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई 25 मार्च तय करते हुए सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि इन पदों को कब तक भरा जाएगा।
अदालत गैर सरकारी संगठन सोशल ज्यूरिस्ट की ओर से अधिवक्ता अशोक अग्रवाल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची ने आरोप लगाया है कि सरकार के आग्रह के बाद भी डीएसएसएसबी ने अब तक भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इनमें से 11,139 पदों को भरने के लिए आग्रह पत्र मार्च, 2020 में ही बोर्ड को भेजे गए थे जबकि बाकी पदों के लिए जनवरी, 2021 में आग्रह भेजे गए।
याचिका में कहा है कि वर्ष 2001 में उच्च न्यायालय ने सरकार और नगर निगम के स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को भरने का निर्देश दिया था। 20 साल पुराने फैसले के हिसाब से हर साल अप्रैल में सरकार और नगर निगम के स्कूलों में रिक्त पदों की संख्या शून्य होनी चाहिए। याचिका के अनुसार मौजूदा समय में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 35 हजार और नगर निगम के स्कूलों में पांच हजार पद खाली हैं।
याचिका में कहा गया है कि शिक्षकों की कमी के कारण समाज के कमजोर तबके के लाखों बच्चों को समुचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी और निगम स्कूलों में शिक्षकों के 40 हजार पद रिक्त होने के चलते 23 लाख बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।