नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के चुुनाव बिना राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह करवाने का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र, दिल्ली सरकार व राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने सभी पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न निगम चुनाव बिना राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह के करवाने का निर्देश दिया जाए। अदालत ने उन्हें 13 अप्रैल से पूर्व अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने यह निर्देश नवादा वार्ड से चुनाव लड़ चुकी अल्का गहलोत की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याची के अधिवक्ता हरज्ञान सिंह गहलोत ने अदालत को बताया कि डीएमसी एक्ट 1957 में निगम चुनाव बिना राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह के करवाने का प्रावधान है लेकिन तय नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने उनकी मुवक्किला की याचिका पर 27 मई 2019 को चुनाव आयोग को इस मामले पर विचार करने का निर्देश दिया था।
हालांकि आयोग ने बिना उनकी मुवक्किला का पक्ष सुने एक अक्तूबर 2019 व चार नवंबर 2020 को आवेदन खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मुवक्किला नगर निगम के वर्ष 17 में हुए चुनाव में नवादा वार्ड से चुनाव लड़ी थी लेकिन उन्हें चुनाव से 15 दिन पहले चुनाव चिन्ह दिया गया। वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनाव चिन्ह पहले से अरक्षित था। यह सरासर संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए बराबरी के अधिकार का हनन है।
उन्होंने कहा चुनाव के दौरान बैलेट पेपर पर पार्टी के चुनाव चिन्ह का प्रावधान खत्म किया जाना जरूरी है। इस पर केवल उम्मीदवार का फोटो होना चाहिए ताकि आम लोग ईमानदारी, प्रतिष्ठा व चेहरा देखकर अपना प्रतिनिधि चुन सकें। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि अगले वर्ष होने वाले निगम चुनाव बिना राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह से करवाने का निर्देश दिया जाए।