देश में समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर सोमवार को एक और याचिका दायर की गई। इसमें केंद्र सरकार और विधि आयोग को समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार करने के लिए न्यायिक आयोग और विशेषज्ञ कमेटी बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने इसे मूल याचिका के साथ संलग्न कर मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्घ कर दिया है।
पेश याचिका में अधिवक्ता अभिनव बेरी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 को लागू किए बिना महिलाओं को लिंग समानता व न्याय, सम्मान नहीं मिल सकता। इस अनुच्छेद का मकसद ही देश में समान नागरिक संहिता लागू कराना है। इसलिए विधि आयोग व केंद्र सरकार को इस संहिता का प्रारूप तैयार करने के लिए न्यायिक आयोग अथवा विशेषज्ञ कमेटी बनाने का निर्देश दिया जाए। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मूल याचिका पर अर्जी दायर कर अपना विरोध जता चुका है। बोर्ड का कहना है कि भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। इस याचिका को खारिज किया जाए या फिर उसका पक्ष भी सुना जाए।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और विधि आयोग को देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग वाली याचिका पर जवाब देने के लिए 8 जुलाई को चार सप्ताह की मोहलत दी थी। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर 31 मई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन पक्षकारों ने जवाब नहीं दिया था। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने केंद्र सरकार व विधि आयोग को भाजपा नेता अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया था। इन पक्षकारों ने याचिका को खारिज करने की मांग की थी, जिसे मानने से इनकार करते हुए खंडपीठ ने कहा था कि सरकार व आयोग हलफनामा पेश कर जवाब दें।