नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने ओपन बुक एग्जाम (ओबीई) करवाने की अनुमति शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय को दे दी। हालांकि इसे लेकर पीठ ने कुछ दिशा-निर्देश भी तय किए हैं। यह परीक्षा स्नातक अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए 10 अगस्त से 31 अगस्त तक कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से होगी।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह की एकल पीठ ने कहा कि छात्रों को ईमेल और दिल्ली विश्वविद्यालय के पोर्टल के जरिये प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाएं और उन्हें उत्तर पुस्तिका अपलोड करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि छात्रों को परीक्षा का माध्यम बदलने के कारण परेशानी का सामना न हो।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि विश्वविद्यालय को छात्रों को ऑटो जेनरेटेड ईमेल भेजने का निर्देश दिया जाता है, जिसमें यह जानकारी हो कि उनकी उत्तर पुस्तिका मिल गई है। इसके साथ ही न्यायमूर्ति ने कहा, ‘मैं छात्रों और डीयू को ओबीई के लिए शुभकामनाएं देती हूं।’
पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि नोडल अधिकारी और सेंट्रल ईमेल आईडी की जानकारियां डीयू की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएं। पीठ ने सीएससी को अपने सभी केंद्रों को इस संबंध में सूचित करने के लिए कहा है। सीएससी उन छात्रों के लिए परीक्षा आयोजित कर रहा है, जिन छात्रों के पास ऑनलाइन परीक्षा देने के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं हैं।
वहीं, पीठ ने ये भी कहा कि प्रश्नपत्र डाउनलोड करने और उत्तर पुस्तिका अपलोड करने में दिक्कतों समेत छात्रों द्वारा उठाए मुद्दे को हल करने के लिए एक अधिकारी होना चाहिए। अगर समस्या का समाधान नहीं होता है तो मामले को शिकायत समिति के पास भेजा जाए। पीठ ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रतिभा रानी के नेतृत्व में छात्रों के लिए एक शिकायत समिति का पुनर्गठन किया।
उन्होंने कहा कि समिति ओपन बुक परीक्षा के चलने तक काम करेगी और छात्रों की शिकायतों को पांच दिनों के भीतर हल किया जाएगा। पीठ ने परीक्षाएं समाप्त होने के बाद डीयू प्रशासन और शिकायत समिति से रिपोर्ट मांगी है।
इस याचिका में ओबीई परीक्षा आयोजित करने के निर्णय को चुनौती दी गई थी और यूजीसी की इस संबंध में जारी अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई थी। डीयू प्रशासन ने याचिका के जवाब में कहा था कि परीक्षा के दौरान छात्रों के बीच सामाजिक दूरी के दिशा-निर्देशों के पालन के लिए ओबीई परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।