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मृत महिला को दुष्कर्म पीड़िता बताने के मामले में सोशल मीडिया मंचों के जवाब से हाईकोर्ट असंतुष्ट

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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने एक मृत महिला को उत्तर प्रदेश के हाथरस की दुष्कर्म पीड़िता दर्शाने के मामले में सोशल मीडिया मंचों फेसबुक, गूगल और ट्विटर के जवाब पर असंतुष्टि जताई है। अदालत ने कहा कि भले ही आपने उन सभी लिंक को ब्लॉक कर दिया है या उन्हें हटा दिया है। इससे पीड़िता के सम्मान को हुई क्षति की पूर्ति नहीं हो सकती। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पीड़िता स्वयं लिंक सर्च नहीं कर सकती और न ही शिकायत कर सकती है। ऐसे में कोई और समाधान होना चाहिए।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह के समक्ष सोशल मीडिया मंचों की ओर से कहा गया कि मृत महिला को दुष्कर्म पीड़िता दिखाने संबंधी सभी लिंक हटा दिए गए हैं। उन्होंने मृत महिला के पति द्वारा दायर याचिका पर अदालत के 23 नवंबर के निर्देश पर यह जवाब दाखिल किया। अदालत ने साथ ही उन्हें वे सभी लिंक हटाने का निर्देश दिया था जिसमें मृतक महिला को दुष्कर्म पीड़िता के रूप में दिखाया था।
महिला के पति की ओर से पेश अधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि आपत्तिजनक कंटेंट के सभी लिंक फेसबुक ने नहीं हटाए हैं और मौजूदा लिंक/यूआरएल को रिकॉर्ड पर रखने के लिए समय मांगा। अदालत ने सुनवाई 12 अप्रैल तय करते हुए सभी लिंक हटाने का निर्देश दिया है।
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याचिकाकर्ता ने तर्क रखा है कि दुष्कर्म पीड़िता की पहचान बताना भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध है। वर्तमान मामले में एक गलत व्यक्ति की छवि को खराब किया गया है। याची ने कहा था कि उनकी दिवंगत पत्नी की एक तस्वीर को हाथरस में एक युवती के साथ दुष्कर्म और हत्या की दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पीड़िता के रूप में गलत तरीके से विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर प्रसारित किया गया।
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हाथरस में 19 वर्ष की युवती से 14 सितंबर को दुष्कर्म किया गया था और उसकी सफदरजंग अस्पताल में 29 सितंबर को मृत्यु हो गई थी।
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