नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने पीड़िता के साथ समझौते के फर्जी दस्तावेज पेश करने वाले दुष्कर्म के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। आरोपी ने फर्जी शपथपत्र के साथ फर्जी हस्ताक्षर और पीड़िता के फर्जी आधार कार्ड की कॉपी जमानत अर्जी के साथ संलग्न कर दावा किया था कि उनके बीच समझौता हो गया है। ऐेसे में अब मामले को चलाने का कोई आधार नहीं है।
न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने जमानत पाने के लिए उक्त कृत्य ही नहीं किया बल्कि पीड़िता द्वारा उसके खिलाफ इस संबंध में एक और प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उसका कृत्य जेल से बाहर आने के लिए उसकी हताशा को दर्शाता है। अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, ऐसे में उसे जमानत देना उचित नहीं है।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी गौर किया कि पीड़िता को आरोपी के खिलाफ मामले को आगे न बढ़ाने के लिए बार-बार धमकी दी जा रही थी। इसके लिए भी पीड़िता की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके अलावा एक अन्य प्राथमिकी में आरोपी पीड़िता के मामले के एक गवाह की हत्या के प्रयास के आरोपों का भी सामना कर रहा है और जांच चल रही थी ।
पेश मामले के अनुसार पीड़िता ने 5 अगस्त, 2020 को शिकायत दर्ज करवाई थी कि आरोपी ने जून 2017 में उसके साथ छेड़छाड़ व दुष्कर्म किया था। पीड़िता ने कहा कि फरवरी 2017 में आरोपी की एल्डोराडो इवेंट्स कंपनी में उसने काम शुरू किया था और वह उसे इवेंट मीटिंग्स के लिए ले जाता था।
आरोपी ने जून माह में उसे सेक्टर 9 द्वारका मेट्रो स्टेशन के पास बुलाया। पीड़िता ने कहा कि आरोपी ने उसे वहां कार में पीने का पानी दिया जिसे पीने के बाद उसे चक्कर आने लगे। इसके बाद आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं आरोपी ने कई मौकों पर उसके बारे में अभद्र टिप्पणियां की थीं और यौन संबंध बनाने के लिए कहा।