हाईकोर्ट ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रसाशन को परिसर में रहने वाले छात्रों व अन्य के लिए तुरंत आइसोलेशन सेंटर बनाने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं जेएनयू परिसर में सभी सुविधाओं युक्त कोविड केयर सेंटर भी बनाने को कहा है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने अपने फैसले में कहा कि आइसोलेशन सेंटर व कोविड केयर सेंटर बनाने के लिए स्थान की पहचान कोविड टास्क फोर्स द्वारा संबंधित एसडीएम की सलाह से की जाए। अदालत ने कहा कि ऐसे में प्रभावित व्यक्ति तुरंत इसोलेट हो जाएंगे। अदालत ने कहा कि ऐसे लोगों के बुनियादी मापदंडों पर नजर रखी जा सकेगी।
अदालत ने यह निर्देश जेएनयू छात्र संघ व टीचरों की एसोसिएशन व दो अन्य प्रोफेसरों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। अदालत ने जेएनयू प्रशासन, छात्र व टीचरों को आपसी मतभेद भुला कर कैंपस व छात्रों की बेहतरी के लिए मिलजुल कर काम करने का सुझाव भी दिया है।
अदालत ने कहा भारत के सबसे प्रभावशाली विश्वविद्यालय, जेएनयू प्रशासन, छात्र और शिक्षक संघों के बीच लगातार तकरार का उबाल आ गया है जबकि कोविड की दूसरी लहर में यह बंद है।
याची ने आरोप लगाया कि जेएनयू परिसर में कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान दिलवाने पर भी कुछ नहीं कर रहा। इस मामले में उन्होंने शिक्षा मंत्रालय, यूजीसी, एसडीएम को भी पत्र लिखा लेकिन कुछ नहीं हुआ। सुनवाई के दौरान जेएनयू प्रशासन और अन्य ने बताया कि कोविड टास्क फोर्स और कोविड रिस्पांस टीम पहले से ही परिसर में काम कर रही है।
अदालत ने मामले की सुनवाई 28 मई तय करते हुए निर्देश दिया है कि कोविड-19 के साथ सकारात्मक पाए जाने वाले लोगों के बुनियादी मापदंडों की निगरानी को सुगम बनाने के लिए यदि किसी सहायक/नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता है, तो एसडीएम और जेएनयू टास्क फोर्स आम सहमति से करेंगे कि पैरामेडिक/नर्सिंग स्टाफ के लिए व्यवस्था कैसे की जाएगी।
अदालत ने कहा कि परिसर में डॉक्टरों को भी आइसोलेशन सेंटर में किसी भी मरीज के लिए स्वयं सेवा के लिए पैनल में शामिल किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि कोविड केयर सेंटर में ऑक्सीजन बेड व अन्य भी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए।