नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने खुफिया ब्यूरो (आईबी) को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि 2006 में मुंबई में हुए ट्रेन विस्फोट मामले में 2009 में या उसके तत्काल बाद कोई रिपोर्ट तैयार की थी या नहीं। अदालत ने यह स्पष्टीकरण मृत्युदंड की सजा पाए दोषी एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी की याचिका पर मांगा है।
याची को 11 जुलाई 2006 को हुए श्रृंखलाबद्ध बम धमाके के मामले में मृत्युदंड दिया गया है। मुंबई की पश्चिमी लाइन की लोकल ट्रेनों में हुए सात बम धमाकों में 189 लोग मारे गए थे और 829 घायल हुए थे।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि एजेंसी ने अदालत को पहले बताया था कि उसे सूचना के अधिकार के तहत रिपोर्ट सौंपने से छूट दी गई थी। अदालत ने कहा आईबी के रुख में विरोधाभास है। आईबी को अपना रुख अदालत में रिकॉर्ड पर पेश करना होगा और शपथपत्र सहित स्पष्ट रूप से बताना होगा कि उसने 2009 में या उसके तत्काल बाद कोई रिपोर्ट तैयार कर तत्कालीन गृह मंत्री को सौंपी थी या नहीं।
अदालत ने आईबी को चार सप्ताह में शपथपत्र दायर करने का निर्देश देते हुए याची को दो सप्ताह में जवाब पर अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तारीख तय की है। याची ने अपनी सजा को गलत तरीके से देने का मुद्दा उठाते हुए तर्क रखा है कि आईबी ने रिपोर्ट तैयार की थी जिसमें काफी विरोधाभास है और अदालत में उक्त तथ्य नहीं रखे गए।