नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने राजधानी में आपातकालीन वाहनों की 24 घंटे बिना बाधा आवाजाही के लिए सड़क पर अलग लेन बनाने की मांग पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार से कहा है। इस मुद्दे पर याचिका दायर की गई थी। हालांकि अदालत ने इसे सड़क की चौड़ाई व नीतिगत मामला बताते हुए सुनवाई और आदेश देने से इनकार कर दिया। फिलहाल सरकार को याचिका पर बतौर ज्ञापन विचार करने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि इस मामले में नीतिगत फैसले की जरूरत है और कोर्ट को इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश जारी करने का कोई कारण नजर नहीं आता। खंडपीठ ने कहा अलग लेन बनाने का मुद्दा सड़क की चौड़ाई और सड़क पर यातायात पर निर्भर करता है। अदालत ने संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि वे याचिका को बतौर ज्ञापन स्वीकार करते हुए मामले के तथ्यों, नियमों, कानून और नीति के अनुसार फैसला करें।
यह याचिका विनय कुमार द्वारा दायर की है। याची ने तर्क रखा कि आमतौर पर देखने को मिलता है कि राजधानी की सड़कों पर यातायात मिलता है। ऐसे में मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस जाम में फंस जाती है और पीड़ितों को समय पर इलाज नहीं मिलता। इसी प्रकार पीसीआर, फायर बिग्रेड की गाड़ियां भी जाम में फंसने के कारण समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंच पातीं।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि दिल्ली सरकार व पुलिस को निर्देश दिया जाए कि आपात सेवा के वाहनों के लिए 24 घंटे सुचारु रूप से चलने के लिए अलग लेन की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस को आदेश का पालन करने के लिए समुचित कदम उठाने का भी निर्देश देनेे का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि ऐसा करने से सभी लोगों को फायदा होगा और वे समय पर अस्पताल पंहुच सकेंगे। याची ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहाकि दिल्ली में 56 फीसदी ट्रैफिक जाम रहता है, जबकि 190 घंटे ट्रैफिक जाम में औसतन नुकसान होता है। वर्तमान में सड़क पर रोजाना यातायात की भारी भीड़ भाड़ के कारण पुलिस और अग्निशमन सेवाओं जैसी आपातकालीन सेवाओं का रिस्पांस टाइम बढ़ गया है।
याची ने कहा कि समय पर चिकित्सा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि समय पर चिकित्सा मिले तो अनेक लोगों के जीवन को बचाया जा सकता है।