नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने आदेश के बावजूद टाउन वेंडिंग कमेटी व उसके अधिकारियों की जानकारी वेबसाइट व अपने कार्यालय के बाहर बोर्ड पर देने में देरी करने पर तीनों एमसीडी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने तीनों एमसीडी को पूरी जानकारी को डिस्प्ले करने की फोटो दो सप्ताह में अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं अदालत ने तीनों एमसीडी को अनुपालन में देरी के लिए अपनी पसंद की जर्जर कॉलोनी के पास एक पार्क का निर्माण करने व सौंदर्यीकरण करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने अपने फैसले में कहा कि यह काफी चिंता की बात है कि हाईकोर्ट ने दो मार्च 2020 को कालू कश्यप के मामले में तीनों एमसीडी को टाउन वेंडिंग कमेटी व उसके अधिकारियों की जानकारी अपनी वेबसाइट तथा मुख्य कार्यालय के साथ जोनल कार्यालय के बाहर डिस्प्ले करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि इससे प्रभावित वेंडर को अधिकारियों से संपर्क करने में सुविधा होगी।
अदालत ने तीनों एमसीडी के आयुक्त, पुलिस आयुक्त, दक्षिणी जिला पुलिस उपायुक्त व मालवीय नगर थानाध्यक्ष के खिलाफ दायर अदालत की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि एक वर्ष बीतने के बावजूद तीनों एमसीडी न अन्य ने आदेश का पालन करना उचित नहीं समझा।
अदालत के नोटिस जारी करने के बाद तीनों एमसीडी ने शपथपत्र दायर कर बताया कि टाउन वेंडिंग कमेटी व उसके अधिकारियों की जानकारी अपनी वेबसाइट के अलावा मुख्य कार्यालय के साथ जोनल कार्यालय के बाहर डिस्प्ले कर दी गई है। उन्होंने माना कि आदेश के पालन में देरी जरूर हुई है।
अदालत ने उनका पक्ष सुनने के बाद दो सप्ताह में पूरी जानकारी फोटो सहित पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि 2 सप्ताह के भीतर उस पार्क की तस्वीरें भी खींचे जो बनाने हैं। इतना ही नहीं पड़ोस के निवासियों को पेड़ों के रोपण और पार्क के रखरखाव में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
पेश मामले के अनुसार दक्षिणी एमसीडी ने पंचशील स्थित मदर डेयरी के पास कालू कश्यप की फूलों की दुकान को हटा दिया था। इसके अलावा उसका सामान जब्त कर लिया था। कालू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उसने कहा कि उसे स्ट्रीट वेंडर के रूप में माना जाए। वह टाउन वेंडिंग कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहता है लेकिन कमेटी की जानकारी ही नहीं है। इस पर अदालत ने कमेटी की जानकारी वेबसाइट व अन्य स्थानों पर डालने का निर्देश दिया था। एक वर्ष में भी आदेश का पालन न होने पर उसने अवमानना याचिका दायर की थी।