नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सऊदी अरब से एक हिंदू व्यक्ति के दफनाए गए पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की सुविधा प्रदान करने के लिए विदेश मंत्रालय को नई दिल्ली स्थित सऊदी दूतावास में मिशन के उप प्रमुख के साथ समन्वय स्थापित करने को कहा है। अदालत ने सऊदी अरब के दिल्ली स्थित मिशन उप प्रमुख से भी आग्रह किया है कि वे कुछ समयसीमा तय करे जिसके भीतर शव के प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया पूरी की जाए।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने मृतक की पत्नी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिया। अदालत ने मंत्रालय के पेश अधिकारी से कहा कि आप सऊदी अरब के अधिकारियों से कहें कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह कोर्ट का अनुरोध है।
अदालत ने हाल ही में इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए विदेश मंत्रालय के उपसचिव को तलब करते हुए कहा था कि वे अदालत के समक्ष पेश होकर शव को भारत लाने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी दें।
अदालत के निर्देशानुसार वाणिज्य दूतावास, पासपोर्ट और वीजा प्रभाग, विदेश मंत्रालय के निदेशक ने अदालत के समक्ष पेश होकर कहा कि किस समयसीमा में शव को भारत वापस लाया जाएगा, उसके बारे में कोई स्पष्टता नहीं है।
उन्होंने कोर्ट को आश्वासन दिया कि इस मामले को उच्च स्तरीय तरीके से देखा जाएगा। दुर्भाग्य से, यह एक दुखद बात है। वे परिवार को इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते कि कब तक शव लाया जाएगा लेकिन मामले को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब में मौजूदा प्रोटोकॉल के अनुसार, भारतीय वाणिज्य दूतावास से एनओसी प्राप्त किए बिना किसी भारतीय के शव का निपटारा नहीं किया जा सकता है। हालांकि मौजूदा मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि कोविड-19 की वजह से भी ऐसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि शव को गैर-मुस्लिम कब्रिस्तान में दफनाया गया है।
अदालत ने सुनवाई में पाया कि इस मामले में भारतीय वाणिज्य दूतावास को दफनाने के बारे में सूचित किया गया था।
मुआवजा प्रदान
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मृतक के नियोक्ता द्वारा भेजे गए 4,68,000 रुपये का मुआवजे का चेक परिवार द्वारा हिमाचल प्रदेश के ऊना में जिलाधीश से एकत्र किया जा सकता है। अदालत ने निर्देश दिया है कि चेक का विवरण और उसके भेजने का विवरण भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा परिवार के वकील के साथ साझा किए जाएं।
अदालत ने कहा कि किसी तरह की देरी होती है तो परिवार आज अदालत में मौजूद विदेश मंत्रालय के अधिकारी से संपर्क कर सकता है। वाणिज्य दूतावास से यह भी कहा गया कि वह नियोक्ता से मिलने वाले किसी भी सहायता के संबंध में याचिकाकर्ता की सहायता करे। अदालत ने मामले की सुनवाई 24 मार्च तय की है।
इसके पूर्व याचिकाकर्ता को भारतीय वाणिज्य दूतावास में अधिकारियों ने बताया कि सरकारी अनुवादक द्वारा की गई गलती के कारण पति के धर्म को मृत्यु प्रमाण पत्र में मुस्लिम के रूप में गलत बताया गया, जिससे उसके मृत शरीर को भ्रम के कारण दफनाया गया।