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Corona Alert: ओमिक्रॉन को हल्का या प्राकृतिक एंटीबॉडी समझना नासमझी, आधी अधूरी जानकारी के साथ सबसे ज्यादा बहस भारत में

Mon, 03 Jan 2022 07:20 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. स्वप्निल पारिख ने कहा कि देश में इस समय अगर ओमिक्रॉन है तो यह भी नहीं भूलें कि उसके साथ डेल्टा वैरिएंट भी है जो सबसे अधिक जोखिम वाला है। रोजाना देश में 300 से 400 ओमिक्रॉन के मामले मिल रहे हैं। 
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फाइल फोटो - फोटो : iStock
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण को हल्का समझना या फिर ओमिक्रॉन को प्राकृतिक एंटीबॉडी की पहचान देते हुए महामारी खत्म होने जैसी बातें करना किसी नासमझी से कम नहीं है। पूरी दुनिया में संक्रमण पर सबसे ज्यादा बहस भारत में हो रही है। वह भी तब जब हमारे पास 20 महीने से भी ज्यादा का अनुभव है लेकिन अभी सरकार से लेकर जनता और कई विशेषज्ञ पहले जैसे ही तर्क दे रहे हैं। इनके लिए कोरोना आज भी हल्का या फिर मामूली सर्दी-जुकाम है। 
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यह कहना है स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. स्वप्निल पारिख का। सोमवार को उन्होंने कहा कि देश में इस समय अगर ओमिक्रॉन है तो यह भी नहीं भूलें कि उसके साथ डेल्टा वैरिएंट भी है जो सबसे अधिक जोखिम वाला है। रोजाना देश में 300 से 400 ओमिक्रॉन के मामले मिल रहे हैं। जबकि कोरोना संक्रमण के मामले ही 20 हजार से अधिक दर्ज किए जा रहे हैं। ऐसे में सिर्फ ओमिक्रॉन को लेकर कई दावे करते हुए इस बीमारी को हल्का समझना सबसे बड़ी भूल होगी। 

डॉ. पारिख ने सोशल मीडिया पर भी लिखा, ‘यदि आप राष्ट्रीय स्तर पर 10 हजार मामले दैनिक देख रहे हैं और फिर अचानक से एक ही शहर में 10 हजार से अधिक मामले सामने आने लगते हैं तो कुछ दिन में यह संख्या राष्ट्रीय स्तर पर एक लाख तक हो सकती है। कोरोना को माइल्ड या प्राकृतिक एंटीबॉडी का दावा करते हुए इन आंकड़ों को सेलिब्रेट किया जा सकता है लेकिन यह एक मूर्खता होगी।’
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हालांकि नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों का मानना है कि अभी दो तरह की स्थिति एक साथ देखने को मिल रही है। अधिकांश मरीजों में संक्रमण का असर कम है, उन्हें भर्ती करने की नौबत कम ही है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोरोना हल्का हो गया है और यह जाते-जाते अपना थोड़ा बहुत असर दिखा रहा है। डॉ. नवनीत का कहना है कि कई लोग ऐसे दावे कर रहे हैं कि ये महामारी का अंत है, इसलिए थोड़ा बहुत असर दिख भी रहा है। जबकि वैज्ञानिक तौर पर इस तरह के दावे फिलहाल नहीं किए जा सकते। 
 
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इनके अलावा लोकनायक अस्पताल के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार भी मानते हैं कि सिर्फ अस्पतालों में बिस्तरों की क्षमता के आधार पर ही कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है। वर्तमान में मरीज कम भर्ती हो रहे हैं लेकिन आगामी सप्ताह के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। इसी तरह साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के डॉ. संदीप बुद्घिराजा का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर जाने के लिए हमें कुछ सप्ताह की स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। अभी दिल्ली के हालात भी ऐसे हैं। 
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