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सेहत : कोरोना काल में महिलाओं पर बढ़ा ‘संकट’, एम्स के सभी ओटी फुल

Fri, 08 Apr 2022 05:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

झज्जर और दिल्ली स्थित एम्स परिसर में गंभीर स्थिति में पहुंच रही हैं महिला मरीज। इस पर डॉक्टरों ने भी जताई है हैरानी।
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एम्स दिल्ली - फोटो : फाइल
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विस्तार
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कोरोना काल में महिला रोगियों की संख्या में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साथ ही साथ इनकी स्थिति काफी गंभीर भी देखने को मिल रही है। लंबे समय तक लॉकडाउन और संक्रमण की वजह से समय रहते उपचार न होने से अधिकांश महिला मरीजों की हालत अब गंभीर हो रही है। इन दिनों दिल्ली के सभी बड़े अस्पतालों में ऐसी महिला मरीज दिखाई भी दे रही हैं।

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नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के अनुसार, उनके यहां सभी ऑपरेशन थियेटर फुल चल रहे हैं। दिल्ली के अलावा एम्स के झज्जर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनआईसी) में भी ऑपरेशन थियेटर भरे हुए हैं। यहां करीब एक महीने तक की सभी सर्जरी पहले से तय की जा चुकी हैं।

एम्स के स्त्री रोग व प्रसूति विभागाध्यक्ष डॉ. नीरजा भटला ने यहां तक कहा कि महिला स्वास्थ्य को लेकर अभी भी काफी जागरूकता की आवश्यकता है। समय पर महिलाओं की जांच और उनका उपचार लंबे समय से चुनौती बना हुआ है जिसे कोरोना महामारी ने और अधिक बढ़ाया। अगर एम्स की बात करें तो इन दिनों एम्स के चार ऑपरेशन थियेटर दिल्ली परिसर में हैं और बाकी चार झज्जर परिसर में मौजूद हैं लेकिन यह सभी फुल चल रहे हैं। 
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एम्स से जानकारी मिलने के बाद जब ‘अमर उजाला’ ने नई दिल्ली के दूसरे बड़े अस्पताल लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, सफदरजंग अस्पताल और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की पड़ताल की तो वहां भी लगभग एक जैसी स्थिति देखने को मिली। यहां तैनात डॉक्टरों ने स्वीकारा कि कोरोना महामारी आने के बाद महिलाओं के स्वास्थ्य पर काफी असर पड़ा है। खासतौर पर कैंसर पीड़ित महिलाओं की स्थिति गंभीर है। सफदरजंग और आरएमएल अस्पताल में भी कुल छह ऑपरेशन थियेटर हैं जहां आगामी दो महीने तक की सर्जरी तय हैं।

पीड़ा सहती है महिला, जल्दी नहीं पता चलने देती : लोकनायक अस्पताल के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार का कहना है कि आज के दौर में महिला स्वास्थ्य पर चर्चा होना बहुत जरूरी है। वे हर दिन अस्पतालों में महिला मरीजों की गंभीर हालत को देखते हैं जिनमें ज्यादातर घरेलू महिलाएं ही शामिल हैं। डॉक्टर बताते हैं कि आमतौर पर घरेलू महिलाएं पीड़ा सहती रहती हैं। वे जल्दी से पता नहीं चलने देती हैं।

उन्हें लगता है कि उनकी परेशानी घर के बाकी कामकाज के आगे कम है और यह स्थिति किसी एक या दो नहीं बल्कि अमूमन हर परिवार में देखने को भी मिलती है। ऐसे में परिवार के सदस्यों की यह जिम्मेदारी भी बनती है कि अगर उनकी मां, पत्नी या बहन और बेटी किसी की दिनचर्या में कुछ अलग लग रहा है तो इसके बारे में उनसे बात जरूर करनी चाहिए। 

पहले की तुलना में कम आ रहीं गर्भवती महिलाएं
कोरोना महामारी से पहले एम्स में हर दिन करीब 20 से 30 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी कराई जा रही थी लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि अब यह संख्या पांच से 10 के बीच दर्ज की जा रही है। डॉ. नीरजा ने बताया कि कोरोना से पहले की बात करें तो गर्भवती महिलाओं की संख्या में कमी आई है। इसके पीछे कारण तो उन्हें नहीं पता लेकिन उम्मीद है कि कोरोना को लेकर अब ज्यादातर राज्यों में छूट दी जा रही है। 

मरीजों की स्थिति

  • एम्स में सालाना भर्ती होने वाले रोगियों में स्त्री रोग विभाग पांचवां सबसे बड़ा विभाग है। यहां बीते एक वर्ष में 4527 मरीजों को भर्ती किया गया। 
  • एम्स में महिला मरीजों की अस्पताल में रुकने की अवधि औसतन नौ दिन दर्ज की गई जोकि पुरुष रोगियों की तुलना में एक दिन अधिक है। 
  • 15,42,854 मरीज बीते एक साल में दिल्ली एम्स की ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे। 
  • 1,40,962 मरीजों को भर्ती और 72,737 ऑपरेशन दिल्ली एम्स में बीते एक साल में किए गए। 
  • बीते एक साल में 828 लड़के, 729 लड़कियां और एक इंटरसेक्स शिशु ने एम्स में लिया जन्म।
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