महंगाई की मार अब रसोई तक पहुंच गई है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के साथ ही खाद्य पदार्थों पर महंगाई की मार पड़ने लगी तो इसी युद्ध की वजह से पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए और इसका सीधा असर खाद्य सामग्री पर देखने को मिल रहा है। युद्ध शुरू होने के साथ ही खाद्य तेल जिसमें खासतौर पर सूरजमुखी के तेल की कीमत आसमान छूने लगी तो साथ ही गेहूं की आवक कम होने से रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाला आटा भी महंगा हो गया। आटे से भी ज्यादा जौ का भाव हो गया। धनिया, जीरा और हल्दी ने भी सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
महंगाई की मार से इन दिनों घर का बजट बिगड़ गया है। महिलाओं को रसोई का खर्च चलाना भारी पड़ रहा है तो कामकाजी लोगों का पेट्रोल, डीजल, सीएनजी के बढ़े भाव की वजह से कार्यालय आना-जाना। यूक्रेन ने जहां तात्कालिक महंगाई को हवा दी है तो पेट्रोल-डीजल के बढ़े हुए मूल्य ने खाद्य पदार्थ के भाव को युद्ध की तरह ही लंबा खींच दिया है। खुदरा बाजार में महंगाई की रफ्तार थोड़ी धीमी है तो खुदरा बाजार में और भाव तेज है।
इतने प्रतिशत बढ़े भाव : चावल, दाल, आटे के भाव में भी इन दिनों बढ़ोतरी हो गई है। अरहर के भाव तो थोक मंडी में नहीं बढ़े हैं, लेकिन उड़द के भाव जरूर बढ़ गए हैं। जौ का भाव रिकॉर्ड तोड़ रहा है। इसमें 30-40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और जौ गेहूं से भी महंगा हो गया है। जौ थोक भाव में 30 रुपये प्रतिकिलो है तो आटा 24 रुपये। इसी तरह चावल के भाव में भी 5-10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। खुदरा बाजार की बात करें तो खाद्य पदार्थ पर 15-20 प्रतिशत अधिक है।
सूरजमुखी के तेल ने सरसों के तेल को पीछे छोड़ा
यूक्रेन युद्ध की वजह से सूरजमुखी के तेल ने सरसों के तेल के भाव को पीछे छोड़ दिया है। थोक भाव में यह तेल 175 रुपया प्रतिलीटर मिल रहा है तो सरसों तेल 145 रुपये। इसी तरह सोयाबीन का तेल भी 160 रुपये तक पहुंच गया है। तेल के भाव में 20-90 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। अच्छी बात यह है कि सरसों की फसल बेहतर होने से खाद्य तेल का भाव रुके हुए हैं, नहीं तो सभी खाद्य तेल 200 रुपये प्रतिकिलो के पार थोक भाव में चले जाते।
हल्दी हुई लाल, जीरा हुआ बड़ा, धनिया भी कम नहीं
रोजमर्रा के इस्तेमाल में प्रयोग होने वाले मसालों की कीमत सातवें आसमान पर पहुंच गई है। हल्दी के दाम में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है तो धनिये में 20 प्रतिशत की। इसी तरह जीरा का भाव तो पेट्रोल के भाव से भी तेज गति पकड़ चुका है। थोक भाव में जीरे की कीमत 230-235 रुपया प्रति किलो तक पहुंच गई है।
बाजार की आवाज...
मौसम प्रतिकूल होने से जीरा, हल्दी, धनिये के भाव तेज हुए हैं। पिछले छह महीने में हल्दी के भाव 15 प्रतिशत तो जीरे के भाव 30-40 प्रतिशत और धनिये के भाव 40 प्रतिशत बढ़ गए हैं। हल्दी महाराष्ट्र व आंध्र प्रदेश से आती है तो जीरा व धनिया गुजरात से आता है। दिल्ली के खारी बावली से पूरे भारत में मसालों की मांग है।
-ललित कुमार गुप्ता, किराना कमेटी, खारी बावली
चावल, गेहूं, उड़द की दाल और जौ के भाव इन दिनों बढ़ गए हैं। पेट्रोल-डीजल एक तरह से महंगाई का थर्मामीटर है। इसके भाव बढ़ते ही सभी चीजें महंगी हो जाती है। जौ गेहूं से भी महंगा हो गया है। पिछले छह महीने में 40-50 प्रतिशत महंगा हुआ है। दिनोंदिन महंगाई और बढ़ेगी क्योंकि आयात की कोई स्थायी नीति सरकार के पास नहीं है।
-नरेश कुमार, प्रधान, दिल्ली ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन, नया बाजार
युद्ध नहीं होता तो सरसों सभी तेल के भाव को नियंत्रित कर देता। सरसों की पैदावार बंपर हुई है। उधर रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से सूरजमुखी तेल काफी महंगा हो गया है। इसी तरह सोयाबीन समेत अन्य वनस्पति तेल की कीमत में आग लगी हुई है। आटा इन दिनों सस्ता रहता है, लेकिन थोक भाव में 24-26 रुपये प्रतिकिलो पर स्थिर हो गया है।
-सतीश बब्बर, महासचिव, दिल्ली वैजिटेबल ऑयल एसोसिएशन