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एलोपैथी मामला: अदालत ने बाबा रामदेव को जारी किया समन, जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय

Wed, 27 Oct 2021 10:08 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अदालत ने कहा कि डॉक्टरों द्वारा दायर यह याचिका स्पष्ट रूप से विचारणीय है। इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए न्यायमूर्ति सी हरिशंकर ने रामदेव को चार सप्ताह का समय दिया है।
 
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बाबा रामदेव - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने योगगुरू रामदेव द्वारा कोरोना महामारी के दौरान एलोपैथी के खिलाफ कथित रूप से गलत जानकारी फैलाने के मामले में समन जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले में रामदेव के अलावा आचार्य बालकृष्ण और पतंजलि आयुर्वेद से भी जवाब मांगा है। अदालत ने माना कि वीडियो क्लिप देखकर लगता है कि रामदेव ने एलोपैथी उपचार प्रोटोकॉल, लोगों को स्टेरॉइड की सलाह देने और अस्पताल जाने वाले लोगों तक का उपहास उड़ाया है।
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न्यायमूर्ति सी हरिशंकर ने एलोपैथी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गूगल, फेसबुक और ट्विटर को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि वह रामदेव के खिलाफ याचिका में आरोपों के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहे और किसी प्रकार की राहत देने के बारे में बाद में विचार किया जाएगा। 
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उन्होंने रामदेव के वकील राजीव नायर से कहा मैंने वीडियो क्लिप (रामदेव के) देखे हैं। वीडियो क्लिप देखकर लगता है कि आपके मुवक्किल एलोपैथी उपचार प्रोटोकॉल पर उपहास कर रहे हैं। उन्होंने लोगों को स्टेरॉइड की सलाह देने और अस्पताल जाने वाले लोगों तक का उपहास उड़ाया है। क्लिप देखकर यह निश्चित रूप से वाद दर्ज करने का मामला है।

वरिष्ठ अधिवक्ता नायर ने कहा कि उन्हें मामले में समन जारी होने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने आरोपों का विरोध किया। नायर ने अदालत से अनुरोध किया वाद के तीन हिस्से हैं। कोरोनिल, मानहानि और टीकाकरण के खिलाफ असमंजस। अदालत केवल मानहानि के मामले में ही नोटिस जारी कर सकती है।अदालत ने कहा वे कोई आदेश जारी नहीं कर रहे। आप अपना लिखित बयान दायर कर कहें कि कोई मामला नहीं बनता। 
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ऋषिकेश, पटना और भुवनेश्वर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के तीन रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के साथ-साथ रेजिडेंट डॉक्टरों के एसोसिएशन, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़, यूनियन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स ऑफ पंजाब (यूआरडीपी), रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, मेरठ और तेलंगाना जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन, हैदराबाद ने इस साल की शुरुआत में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

उन्होंने आरोप लगाया है कि बाबा रामदेव जनता को एलोपैथी के संबंध में गुमराह और गलत तरीके से पेश कर रहे है कि कोविड-19 से संक्रमित कई लोगों की मौतों के लिए एलोपैथी जिम्मेदार है और यह संकेत दे रहा है कि एलोपैथिक डॉक्टर मरीजों की मौतों का कारण बन रहे हैं। याची की और से पेश वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने कहा कि एक महामारी के बीच, योग गुरु ने कोरोनिल पर अप्रमाणित दावे किए, जो कोविड -19 के लिए एक इलाज है, जो केवल 'इम्यूनो बूस्टर' होने के लिए दवा को दिए गए लाइसेंस के विपरीत है।

याचिका में एसोसिएशनों ने कहा कि योग गुरु जो कि अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, न केवल एलोपैथिक उपचार बल्कि कोविड -19 टीकों की सुरक्षा और प्रभावकारिता से संबंधित आम जनता के मन में संदेह बो रहे है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि गलत सूचना अभियान रामदेव द्वारा बेचे गए उत्पाद की बिक्री को आगे बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन और विपणन रणनीति के अलावा कुछ नहीं था, जिसमें कोरोनिल भी शामिल है।
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