संत रविदास मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट जा सकती है आप सरकार
नई दिल्ली। तुगलकाबाद स्थित संत रविदास मंदिर तोड़े जाने के मामले में दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकती है। इसके लिए सरकार फिलहाल कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ले रही है। कानूनी रास्ता मिलने पर अगले हफ्ते सरकार इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। इस दौरान मामले का समाधान कराने की कोशिश होगी।
दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने बताया कि आजादी से पहले के सरकारी दस्तावेजों में संबंधित जमीन मंदिर के नाम है। दस्तावेजों में रविदास मंदिर और जाति विशेष वाला जोहड़ दर्ज है। ऐसे में इसे वन भूमि का अतिक्रमण नहीं कहा जा सकता। यह 40 करोड़ लोगों की आस्था का विषय है। केंद्र सरकार और डीडीए ने अदालत के सामने सभी तथ्य नहीं रखे। ऐसे में केंद्र सरकार को मामले में रिव्यू याचिका डालनी चाहिए।
गौतम का कहना है कि मामले में पक्षकार न होने और अदालत से फैसला आने के बाद अब दिल्ली सरकार वकीलों से राय ले रही है कि इसमें दिल्ली सरकार कैसे पक्षकार बन सकती है। दिल्ली सरकार मामले को राजनीतिक रंग न देकर इसका समाधान चाहती है। अगर जरूरत पड़ी तो सरकार अदालत में जरूर याचिका लगाएगी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने इन सारे तथ्यों को रखा जाएगा। साथ ही अदालत से गुजारिश की जाएगी कि मंदिर के हिस्से में जितनी जमीन है, उससे कहीं ज्यादा ज्यादा जमीन पर दिल्ली सरकार घना पौधरोपण करेगी।
राजेंद्र पाल गौतम के मुताबिक, 1980 में डीडीए का वन भूमि के तौर पर जमीन मिली थी। मामले का एक समाधान यह भी हो सकता है कि डीडीए इसका लैंड यूज बदलने का एक प्रस्ताव तैयार कर दिल्ली सरकार को देे। दिल्ली सरकार इस पर तुरंत अपनी सहमति दे देगी। इसके बाद केंद्र सरकार वन भूमि को जमीन को डि-नोटिफाई कर देगी।
गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा में संत रविदास के मंदिर को तोड़ने का मसला उठाया गया था। विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर मांग की गई है कि सरकार अध्यादेश लाकर जमीन रविदास मंदिर को दे दे। वहीं, केंद्र सरकार से रिव्यू पिटीशन डालने की भी अपील की थी। इसके अलावा जमीन का लैंड यूज भी बदला जा सकता है। वहीं, राजस्व मंत्री कैलाश गहलोत का कहना है कि इसकी प्रक्रिया की शुरुआत डीडीए को करनी होगी।