जी-20 शिखर सम्मेलन को यादगार और वैश्विक पटल पर भारतीय संगीत को पहुंचाने के लिए भारत मंडपम में संगीत का धारा बहेगी। जी-20 राष्ट्राध्यक्षों और विशिष्ट आमंत्रित अतिथियों को नौ को रात्रिभोज के दौरान ‘भारत-वाद्य-दर्शनम’ थीम पर दुर्लभ वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति देखने को मिलेगी। इसमें प्राचीन काल से अब तक के वाद्य यंत्रों के तार छिडेंगे।
शास्त्रीय, लोक और कंटेम्परेरी संगीत के 78 कलाकार एक साथ वाद्ययंत्र बजाएंगे, जिसमें शाम के वक्त के रागों का इस्तेमाल होगा। संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने पूरा कॉन्सेप्ट तैयार किया है। इसे पूरे देश से अलग-अलग आयु वर्ग के कलाकार अपनी पारंपरिक पोशाक में प्रस्तुति देंगे। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीनस्थ संस्था संगीत नाट्य अकादमी ने विदेशी मेहमानों के लिए आजादी के 77वें अमृतकाल महोत्सव में खास तौर पर यह दुर्लभ वाद्य यंत्रों पर प्रस्तुति तैयार की है।
यह भारत ही नहीं दुनिया में सबसे अलग अनोखी समूह प्रस्तुति होगी। इसमें 34 हिंदुस्तानी संगीत वाद्ययंत्रों का समावेश किया गया है। इसमें 18 कर्नाटक संगीत वाद्ययंत्र और 26 राज्यों के 26 लोक संगीत वाद्ययंत्र शामिल हैं। देश की विविध कलात्मक अभिव्यक्तियों को वास्तव में बेहद ही खूबसूरती के साथ जुगलबंदी का अनूठा समावेश सुनाई देगा। इसमें वाद्ययंत्र, जनजातीय वाद्ययंत्र, शास्त्रीय संगीत वाद्ययंत्रों के साथ-साथ लोक वाद्ययंत्र का एक सुंदर ध्वनि परिदृश्य बनेगा। श्रोताओं को सबसे प्राचीन वैदिक संगीत भी सुनने को मिलेगा।
राग भैरवी में मिले-सुर, मेरा तुम्हारा से समापन
भारत की संगीत यात्रा के दौरान 3 घंटे की प्रस्तुति में मेहमानों को 1-1 घंटे की तीन प्रस्तुति में विभिन्न राज्यों के पारंपरिक संगीत से रूबरू होने का मौका मिलेगा। विलंबित लय में 'उत्साह' प्रस्तुति की शुरुआत होगी। दूसरी प्रस्तुति में मध्यम व द्रुत लय में 'भारत-वाद्य-दर्शनम' पार्ट एक में राग बिहाग व रविंद्र संगीत की ओर सजनी-सजनी राधिका लो से शुरुआत होगी। राग पीलू, राग देश (तिलताना), राग खमाज (बंदिश) की पेशकेश होगी। इसमें सबसे खास प्रस्तुति राग मालकौन्स में दुर्लभ वाद्ययंत्र जैसे रुद्र वीणा, विचित्र वीणा, मट्टा कोकिला वीणा आदि पर जुगलबंदी खास होगी। इसके बाद राग भैरवी में मिले सुर, मेरा तुम्हारा ...से समापन होगा।
हिंदुस्तानी, कनार्टक, लोक और समकालीन संगीत की जुगलबंदी
संगीत नाट्य अकादमी दुर्लभ भारतीय पारंपरिक वाद्य यंत्रों, विविध संस्कृति की विशाल अमूर्त विरासत को बढ़ावा देने, विभिन्न कलाओं की शैलियों को संरक्षित करने में जुटी हैं। इसी के तहत भारत वाद्य दर्शन म्यूजिकल एन्सेम्बल एक अद्वितीय संगीतमय प्रस्तुति है। यहां पर हिंदुस्तानी संगीत, कर्नाटक संगीत, लोक और समकालीन संगीत की जुगलबंदी दिखेगी। दुर्लभ वाद्ययंत्रों में भपंग, सुरबहार, सुरश्रृंगार, जलतरंग, नलतरंग, विचित्र वीणा, रुद्र वीणा, सरस्वती वीणा, धांगली, सुंदरी, दिलरुबा, तार शहनाई आदि वाद्ययंत्रों को पेश किया जाएगा। इसके अलावा श्रोताओं को मृदंग, वांसुरी, वीणा, संतुर, सरोद, वायलिन, ढाेलकी, सारंगी, रबाब, ढोलक, तबला, पखबाज, तार शहनाई, खरताल, ड्रम आदि की जुगलबंदी भी दिखेगी।