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Delhi News: 100 से ज्यादा फर्जी होटल बुकिंग वेबसाइट बनाने वाले 4 आरोपी गिरफ्तार

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दिल्ली सहित कई राज्यों में फैला था नेटवर्क, 500 से ज्यादा लोगों से कर चुके हैं ठगी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्व जिले की साइबर थाना पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए चार साइबर जालसाजों को गिरफ्तार किया है। आरोपी पूरे भारत में फर्जी होटल बुकिंग वेबसाइट चलाकर लोगों के साथ ठगी कर रहे थे।
पुलिस ने इनकी 100 से ज्यादा फर्जी होटल वेबसाइटें पकड़ी हैं, साथ ही एनसीआरपी पोर्टल के जरिए 132 संबंधित शिकायतों का पता चला है। पुलिस को जांच में पता चला है कि आरोपी 1 करोड़ से ज्यादा की रकम लोगों से ठग चुके हैं। आरोपी 500 से ज्यादा लोगों के साथ ठगी कर चुके हैं। दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस उपायुक्त डॉ. हेमंत तिवारी ने बताया कि इनके कब्जे से अपराध में इस्तेमाल किए गए 6 मोबाइल, 1 लैपटॉप और जाली डिजिटल रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि शशांक रायजादा ने साइबर पुलिस स्टेशन में 19 अगस्त को जेडब्ल्यू मैरियट, चंडीगढ़ में होटल बुकिंग के बहाने 68,000 रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी के संबंध में एक शिकायत दी थी। पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4)/61(2)/3(5) के तहत मामला दर्जकर जांच शुरू की। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि एसीपी ऑपरेशन हरि सिंह, साइबर थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर पंकज कुमार व इंस्पेक्टर पंकज लाकड़ा की टीमों ने 23 से 31 अक्तूूबर के बीच पांच राज्यों में 144 घंटे का अंतरराज्यीय ऑपरेशन चलाया। ग्राम झेंझपुरी, जिला डीग (राजस्थान) में घेराबंदी कर जिला डीग राजस्थान निवासी शरूप (26), एकरार (27) और सोहेल (24) को गिरफ्तार कर लिया गया। ये तीनों एक ही गांव के रहने वाले हैं।
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पुलिस उपायुक्त ने बताया कि डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से पता चला कि एड्सलाइन नामक एक ऑनलाइन विज्ञापन एजेंसी के माध्यम से फर्जी होटल बुकिंग वेबसाइटें बनाई गई थीं। एड्सलाइन के मालिक ग्राम भूरा किशनी, उत्तराखंड निवासी गोपाल सिंह कार्की का पता लगाया गया और 30 अक्तूबर को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके कब्जे से फर्जी वेबसाइट बनाने और चलाने में इस्तेमाल किए गए उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बरामद किए गए। आरोपियों ने भारत भर के प्रतिष्ठित पांच सितारा होटलों के नाम पर फर्जी वेबसाइटें बनाकर साइबर धोखाधड़ी का तरीका अपना रखा था।
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कमीशन पर सेवाएं देता था
आरोपी गोपाल सिंह कार्की ने खुलासा किया कि वह अन्य आरोपियों को कमीशन के आधार पर डिजिटल मार्केटिंग और वेबसाइट सेवाएं प्रदान करता था। यह गिरोह असली होटल पोर्टलों की नकल करके फर्जी वेबसाइटें अपलोड करता था और पीडि़तों द्वारा किए गए भुगतान उनके द्वारा नियंत्रित विभिन्न खातों के माध्यम से किए जाते थे। यह गिरोह दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड में सक्रिय था और ऑनलाइन होटल बुकिंग की तलाश करने वाले पीड़ितों को निशाना बनाता था। शरुप पहले एक आपराधिक मामले में शामिल रहा है। वह इस रैकेट में कॉल करने, नकली सिम कार्ड की व्यवस्था करने और पीडि़तोंं से बातचीत करता था। आरोपी सोहेल ठगी की रकम से खरीदी गई चीजों को एकत्रित करता था। बाद में इन्हें रियायती दरों में बेचता था।
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