दिल्ली में कोरोना संक्रमण से बुधवार को चार मरीजों की मौत हो गई। इससे पहले 13 मई को एक दिन में चार मरीजों की मौत दर्ज की गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने जानकारी दी है कि पिछले 24 घंटे में 400 से ज्यादा लोग संक्रमित मिले हैं जबकि मंगलवार को एक दिन में 418 लोग संक्रमित मिले थे। विभाग ने बताया कि बीते एक दिन में 22490 नमूनों की जांच में 1.89 फीसदी यानि 424 नए संक्रमित मरीज मिले हैं।
बीते रविवार के बाद पहली बार दिल्ली में दैनिक संक्रमण दर दो फीसदी से कम दर्ज की गई है। इसके अलावा बीते दिन चार मरीजों की मौत के अलावा 499 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सक्रिय मामले भी कम हुए हैं। फिलहाल दिल्ली में कोरोना के 1762 सक्रिय मामले हैं। इनमें सर्वाधिक 1258 मरीज अपने घरों में उपचाराधीन हैं। जबकि अस्पतालों में 101 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें से 27 की हालत गंभीर बताई जा रही है। कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 1904664 हो गई है। अब तक 26207 मरीजों की मौत हुई है। वहीं, 1876695 मरीज ठीक हुए हैं। राजधानी में अभी भी 483 कंटेनमेंट जोन हैं।
10 में से छह मरीजों में संक्रमण से पहले थी बीमारी
दिल्ली में कोरोना महामारी की पहली चार लहर की स्थिति सामने आई है। इसके अनुसार 10 में से छह मरीज संक्रमित होने से पहले ही किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त थे। इनमें हर तीसरा मरीज उच्च रक्तचाप से पीड़ित था। दिल्ली सरकार के राजीव गांधी सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने मार्च 2020 से 2021 के दौरान आईं चार लहर में संक्रमित मरीजों पर एक अध्ययन किया है। इसमें डॉक्टरों को एक अनुमान पता चला है। इसके अनुसार उच्च रक्तचाप कोरोना मरीजों में सबसे आम सह-रुग्णता पाई गई।
जानकारी के अनुसार दिल्ली में कोरोना संक्रमित मरीज दो मार्च 2020 को सामने आया था। इसके बाद से जनवरी 2021 तक संक्रमित हुए मरीजों में से डॉक्टरों ने 3534 रोगियों का चयन किया। इनमें बच्चों से लेकर युवा, व्यस्क और बुजुर्ग तक शामिल हैं जिनकी आयु नौ से लेकर 96 वर्ष तक है। हाल ही में जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर में प्रकाशित इस अध्ययन में डॉक्टरों ने बताया कि दिल्ली में लक्षणग्रस्त कोरोना मरीजों में सबसे ज्यादा बुखार और खांसी की परेशानी वाले थे। इनकी संख्या अनुमानित तौर पर 94.40 फीसदी तक थी। जबकि शेष 5.6 फीसदी रोगियों में कोई लक्षण नहीं था। इससे साफ पता चलता है कि दिल्ली में बगैर लक्षण वाले कोरोना मरीज काफी कम थे। जबकि सरकारें यही दावा कर रही थीं कि ज्यादातर लोगों में कोरोना के लक्षण नहीं है या फिर हल्का असर है।