नई दिल्ली। अदालत ने 15 साल पहले कथित जबरन वसूली के प्रयास मामले में दिल्ली के पूर्व उद्योग मंत्री दीपचंद बंधु के पोते को बरी कर दिया है। उस पर मंत्रालय का कर्मी बताकर दो लोगों से जबरन वसूली के प्रयास का आरोप था।
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ऋषभ कपूर ने कहा कि अभियोजन ये साबित करने में नाकाम रहा है कि आरोपी अमरपाल ने खुद को मंत्रालय कर्मी बताकर दुकानदारों से रुपये वसूलने का प्रयास किया। अमरपाल पर आरोप था कि उसने दुकानों को अनाधिकृत और उनके डिमोलिशन की बात कहकर रुपये ऐंठने का प्रयास किया।
अदालत ने कहा कि इस मामले में दोनों मुख्य गवाह जो शिकायतकर्ता भी थे, वे ही अपनी गवाही से पलट गए और आरोपी को कोर्ट में नहीं पहचाना। तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक (पीए) होने का दावा करने वाले एक अन्य गवाह की गवाही को अविश्वसनीय बताते हुए न्यायाधीश ने कहा कि यह राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण आरोपी को फंसाने की कोशिश हो सकती है।
अदालत ने एक नवंबर के अपने आदेश में आरोपी को जबरन वसूली, प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी के आरोपों से बरी कर दिया। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने इस मामले में 16 गवाहों से जिरह की थी। मुकदमे के दौरान अमरपाल के वकीलों ने अदालत को बताया था कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया था, क्योंकि वह पूर्व उद्योग मंत्री दीप चंद बंधु के पोते हैं। सत्तारूढ़ दल के साथ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण मामले में फंसाया गया था।
वकीलों की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि अभियोजन पक्ष के गवाह न तो अमरपाल की पहचान कर सके और न ही उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत मिले। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अमरपाल के खिलाफ अगस्त 2006 में मामला दर्ज किया था। अदालत ने इस मामले में फैसला आठ अक्तूूबर 2021 को सुरक्षित रखा गया था।