राजधानी के गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए वन विभाग बेहद तेजी से काम कर रहा है। अब वह जल संचयन के लिए चेकडैम की मदद लेगा। फिलहाल 50 चेकडैम का निर्माण करेगा। वन क्षेत्र में सर्वे का काम जारी रखते हुए वन विभाग जलाशयों के निर्माण के लिए भी जगह तलाश रहा है, जिससे वर्षा जल का संग्रह करने में मदद मिलेगी।
दिल्ली में कई रिज इलाके हैं। वन विभाग इनमें वर्षा जल संचयन पर जोर दे रहा है। विभाग के पश्चिमी डिवीजन की ओर से दक्षिणी क्षेत्र में 10 और सेंट्रल रिज में 40 चेकडैम का निर्माण किया गया है। पश्चिमी डिवीजन के उप वन संरक्षक नवनीत श्रीवास्तव के मुताबिक, रिज इलाके में कई ऐसी जगह हैं, जहां चेकडैम का निर्माण किया जा सकता था।
वहीं, इस मानसून वर्षा का रिकॉर्ड भी अधिक दर्ज किया गया है। इसलिए विभाग की ओर से बनाए गए 50 चेकडैम से निश्चित तौर पर भूमिगत वर्षा जल संचय में मदद मिलेगी। विभाग की टीम लगातार इस दिशा में प्रयास जारी रखे हुए और चेकडैम बनाने के लिए अन्य जगहों की भी तलाश कर रही है। एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली फिलहाल करीब 150 चेकडैम हैं।
जलाशयों के निर्माण पर भी जोर
वन विभाग की ओर से पश्चिमी डिवीजन द्वारा तीन जगहों पर जलाशयों का निर्माण भी किया गया है। विभाग ने घिटोरनी में 30 मीटर, रजोकरी में 800 और सेंट्रल रिज में करीब 40 मीटर लंबे जलाशयों का निर्माण किया है। अन्य जगहों पर भी जलाशय निर्माण के लिए जगह की तलाश की जा रही है। उप वन संरक्षक के मुताबिक, जलाशयों के निर्माण के लिए उन स्थानों की तलाश की जाती है, जहां हर दिशा से पानी का ढलाव एक जगह पर होता है। वहीं, वर्षा जल को संग्रह करने में मदद मिलती है।
इसलिए जरूरी होते हैं चेकडैम
चेकडैम का प्रमुख उद्देश्य वर्षा जल को संग्रह करना होता है। यह पानी बरसात के दौरान और उसके बाद भी इस्तेमाल किया जाता है। इससे भूजल स्तर में भी बढ़ोतरी होती है और खेतों की सिंचाई भी की जाती है। पानी को रोकने के लिए पक्के चेकडैम का निर्माण किया जाता है। इससे एक जगह पर पानी काफी समय तक ठहरा रहता है और धीरे-धीरे पानी जमीन में रिसता रहता है।