रोहिणी जिले के बुध विहार स्थित रिठाला गांव में एक सनकी पिता ने शराब पीने के दौरान हुए झगड़े में अपने 30 साल के बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात के समय आरोपी ओमपाल (60) अपनी पत्नी से झगड़ा कर रहा था। बेटे बलबीर उर्फ मोनू ने इसका विरोध किया तो आरोपी आग बबूला हो गया।
अल्मारी से अपनी लाइसेंसी पिस्टल लाया और बेहद नजदीक से बेटे के सीने में गोली मार दी। परिवार के बाकी सदस्यों ने आरोपी ओमपाल को पकड़ लिया। बलबीर को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक करीब 33 साल पहले मामूली कहासुनी के बाद आरोपी ओमपाल ने मंगोलपुरी इलाके में अपनी मां माया देवी की चाकू घोंपकर हत्या कर दी थी।
हत्या के बाद पुलिस ने उसे दबोच लिया था। दस माह जेल में रहने के बाद वह केस से बरी हो गया था। आरोपी ने छह साल पूर्व पिस्टल का लाइसेंस गौतमबुद्ध नगर से बनाया था। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
बेटे की हत्या करने का आरोपी को बिल्कुल भी अफसोस नहीं है। पुलिस ने मंगलवार को उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने बलबीर के शव का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिवार के हवाले कर दिया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। पुुलिस के मुताबिक ओमपाल अपने परिवार के साथ रिठाला गांव में रहता है। इसके परिवार में पत्नी पवित्रा देवी, तीन बेटे और दो बेटी हैं।
ओमपाल का प्रॉपर्टी डीलिंग का कारोबार है। उसने अपनी कई प्रॉपर्टी किराए पर दी हुई हैं, जिसका मोटा किराया आता है। सोमवार देर रात ओमपाल घर में बैठकर शराब पी रहा था। पत्नी पवित्रा ने ज्यादा शराब न पीने के लिए कहा तो आरोपी गाली-गलौज करने के अलावा अपनी पत्नी को पीटने लगा।
बलबीर ने विरोध किया तो ओमपाल भड़क गया। उसने बेटे को पीटा और अल्मारी से पिस्टल लाकर अपने बेटे की हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी को पकड़ लिया। बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि आरोपी सनकी मिजाज का है। अक्सर लोगों से झगड़ा करता रहता है।
इसी वजह से वर्ष 1987 में उसने अपनी मां की चाकू घोंपकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, लेकिन परिजनों की गवाही की वजह से वह दस माह में ही जेल से छूटकर बाहर आ गया था। बाहर आने के बाद उसने दोबारा ऐसा ही व्यवहार शुरू कर दिया था। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।