दिल्ली सरकार ने करीब 1.10 लाख ऑटो, ई-रिक्शा, ग्रामीण सेवा चालकों को आर्थिक मदद दी है। सरकार ने इनके आधार से लिंक खाते में सीधे 5-5 हजार रुपये डाल दिए हैं। परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत का कहना है कि इस मद में सरकार को करीब 55.04 करोड़ रुपये खर्च पड़े हैं।
वहीं, जिन्हें मदद नहीं मिली है वह दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर पंजीकरण कराकर योजना का फायदा ले सकते हैं। कैलाश गहलोत का कहना है कि योजना घोषित करते समय पैरा ट्रांजिट वाहन के बैज व परमिट धारक ही इसमें शामिल थे, लेकिन बाद में इसमें ई-रिक्शा चालकों को भी शामिल किया गया, परंतु इनके पास बैज नहीं है।
ऐसे में उन्हें योजना का फायदा लेन के लिए दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर http://pucc.delhi.gov.in/cvfa/checkAadhaar.jsp पर पंजीकरण कराना होगा। इसे बुधवार को लांच किया गया।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में 4 मई 2020 को कैबिनेट की बैठक हुई थी। इसमें दिल्ली सरकार ने पब्लिक सर्विस व्हीकल (पीएसवी) के बैजधारकों को दी जा रही एकमुश्त सहायता राशि की योजना का विस्तार करते हुए पैरा ट्रांजिट वाहन के परमिट धारक चालकों की तरह दिल्ली में पंजीकृत ई-रिक्शा मालिकों व लाइसेंस धारियों को भी 5-5 हजार रुपये की सहायता राशि देने की मंजूरी दी थी।
डीएल और आधार का मिलान
कैलाश गहलोत ने बताया कि जब सरकार ने चालकों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का फैसला किया, उस दौरान चालकों का सरकार के पास बैंक खाता नहीं था। चालकों का खाता प्राप्त करने के लिए एक वेबसाइट बनाई गई। इस पर चालकों ने अपने ड्राइविंग लाइसेंस की मदद से आवेदन किया।
इस दौरान यह समस्या आई कि कई चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस पर दर्ज नाम को आधार कार्ड से मिलान किया गया तो नाम अलग-अलग पाया गया। इसके बाद एक और वेबसाइट बनाई गई। इस पर चालकों से आधार कार्ड में दर्ज अपना और अपने पिता के नाम को भर कर जमा करने के लिए कहा गया। इस वेबसाइट पर प्राप्त डाटा की जांच की गई और जिनके नाम का मिलान हो गया।
उनके ड्राइविंग लाइसेंस में आधार कार्ड के मुताबिक नाम ड्राइविंग लाइसेंस में बदल दिया गया। फिर, आधार कार्ड से लिंक बैंक खाते में दिल्ली सरकार ने पैसे भेज दिए। कैलाश गहलोत ने भरोसा दिलाया कि सभी पात्र चालकों को मदद दी जाएगी।