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किसान आंदोलन: शहादत दिवस की तैयारी में दाना मंडी से दिल्ली तक युवा सम्मेलन की गूंज

Mon, 22 Mar 2021 03:30 AM IST
योगेश जोशी आदित्य पाण्डेय. अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • टीकरी बॉर्डर पर भारी संख्या में युवक-युवतियों ने लिया युवा सम्मेलन में हिस्सा।
  • 23 मार्च को भगत सिंह के सहादत दिवस पर युवा बताएंगे आजादी के मायने।
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किसान आंदोलन का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली के प्रदर्शन स्थलों पर किसानों की ताकत को सुनिश्चित करने के लिए दोबारा युवा लामबंद हो रहे हैं। युवाओं का केंद्र अभी पंजाब की तरफ है, लेकिन रविवार को दाना मंडी से लेकर दिल्ली के किसान धरना स्थलों पर भी युवा सम्मेलन आयोजित किये गए और उसकी गूंज भी साफ सुनाई दी। सुनाम की दाना मंडी में रविवार को हुए युवा सम्मेलन में युवकों के साथ-साथ युवतियों का भी सैलाव उमड़ पड़ा था। जबकि टीकरी बॉर्डर पर बीबी गुलाब कौर नगर में भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के साथ भारी संख्या में युवाओं ने एकत्रित होकर इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए। 

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भारतीय किसान यूनियन उगराहां के नेता सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने कहा कि आजादी के 75वें साल में बड़े दुख के साथ उन्हें कहना पड़ रहा है कि सन् 1947 में देश को झूठी आजादी मिली, गोरों ने केवल कालों को गद्दी सौंप दी। तभी तो यह आजादी मिलने के इतने वर्षों बाद भी देश में किसानों, मजदूरों और गरीब तबके के लोगों की हालत बेबस और लाचार जैसी है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता तो आज लगभग सवा सौ दिनों से देश के किसान सड़कों पर ना बैठे होते। उन्होंने बताया कि युवा सम्मेलन में तय हुआ है कि भगत सिंह के सहादत दिवस के मौके पर देश के नौजवान लोगों को बताएंगे कि भगत सिंह ने किस तरह के भारत का देखा था, जिसकी खातिर उन्होंने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था। 

हम जिस आजाद मुल्क की बात कर रहे हैं वह भगत सिंह के सपने से मेल नहीं खाता है। लेकिन अब युवाओं की ताकत से देशभर में किसानों, मजदूरों, लाचारों की आवाज पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेना होगा और किसानों को इस बार उनका पूरा हक देकर ही दिल्ली से वापस भेजना होगा। तभी किसानों का आंदोलन समाप्त होगा, वर्ना किसानों ने जैसे अभी तक आंदोलन को आगे बढ़ाया है, वह आगे भी इसी तरह इसे आगे ले जाएंगे।

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