फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीएसटी लागू होने के तीन साल बाद भी नहीं सुलझी व्यापारियों की समस्या

विज्ञापन
विज्ञापन
नई दिल्ली। जीएसटी लागू होने के तीन साल बाद भी व्यापारियों की कई समस्याएं है जिसका समाधान नहीं हो पाया। व्यापारी अभी भी इसकी विसंगतियों को दूर करने की लगातार मांग कर रहे हैं। मुख्य रूप से ई-वे बिल, रिवर्स चार्ज, वार्षिक रिटर्न में छूट, रिटर्न दाखिल करते समय गलतियों को माफ करना है। इसके साथ ही व्यापारियों का एक गुट पेट्रोल की कीमत पर जीएसटी लागू करने की मांग कर रहा है।
विज्ञापन

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की दिल्ली इकाई ने कहा है कि जीएसटी लागू हुए तीन साल पूरे हो गए। इसके नियमों की वजह से व्यापारी आज भी परेशान हो रहे हैं। ई-वे बिल की इंटर स्टेट लिमिट 50 हजार से बढ़ाकर कम से कम दो लाख होनी चाहिए। पांच करोड़ से कम टर्न ओवर वालों को वार्षिक रिटर्न भरने में छूट मिलनी चाहिए।
व्यापार मंडल के महामंत्री हेमंत गुप्ता का कहना है कि रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया सरल होनी चाहिए। व्यापारियों के पर्सनल बैंक एकाउंट को व्यापार से नहीं जोड़ना चाहिए। किसी भी रजिस्टर्ड फर्म को सभी तरह के सामान को बेचने की अनुमति मिलनी चाहिए।
विज्ञापन

हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि इसकी उपलब्धियां भी कम नहीं हैं। इस टैक्स सिस्टम से पूरा देश एक टैक्स के अंतर्गत आ गया है। पारदर्शिता बढ़ी है तो कैश पर निर्भरता भी घटी है। चेक पोस्ट खत्म होने से व्यापारियों को लाभ भी मिला है। क्रेता और विक्रेता की वास्तविक पहचान भी आसान हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर समस्या का समाधान हुआ है।
उधर व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि पेट्रोल-डीजल पर भी जीएसटी लगाई जाए ताकि इसकी कीमत में कमी हो सके और व्यापारी सस्ते दर पर माल का आयात-निर्यात कर सके। इससे ग्राहकों को भी फायदा पहुंचेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें