फर्जी बिलों के जरिए एम्स के नेत्र चिकित्सा सामान की जाली आपूर्ति दिखाकर अपने खाते में 13.80 करोड़ रुपये का ट्रांसफर कराने के मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने एक फर्म की मालकिन को गिरफ्तार किया है। पुलिस आरोपी महिला से पूछताछ कर पूरे सिंडिकेट में शामिल आरोपियों का पता लगाने की कोशिश में जुट गई है।
शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आर के सिंह ने बताया कि आरोपी की पहचान पीतमपुरा निवासी स्नेह रानी गुप्ता(59) के रूप में हुई है। वर्ष 2021 के सितंबर माह में एम्स के राजेंद्र प्रसाद नेत्र चिकित्सा केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर अनूप डागा ने आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत की। जिसमें बताया कि अस्पताल में चिकित्सा सामान की जाली आपूर्ति दिखाकर एम्स के खाते से पांच करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
यह रकम मैसर्स स्नेह इंटरप्राइजेज के बैंक खाते में गई है। पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद जांच शुरू की। जांच में पांच करोड़ की जगह 13.80 करोड़ रुपये के घोटाला की जानकारी मिली। पुलिस ने स्नेह इंटरप्राइजेज के बैंक खाते की जांच की। जिसमें पता चला कि कंपनी को उस सामान का भुगतान किया गया है जिसका अस्पताल में आपूर्ति नहीं की गई है। हालांकि कंपनी ने गाडिय़ों के जरिए सामान की एम्स में आपूर्ति करना दिखाया था।
जांच में पता चला कि जिन गाड़ियों से सामान की आपूर्ति दिखाई गई वह कभी एम्स में आई ही नहीं। उस गाड़ी के जीपीएस की जांच की गई तो पता चला कि उस तारीख को गाड़ी का लोकेशन दिल्ली से बाहर की थी। कंपनी कई साल से एम्स में सामान की सप्लाई कर रही है और उसने एम्स के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा को अंजाम दिया।
जांच में पता चला कि कंपनी ने सप्लाई ऑर्डर के बदले बिना सामान की आपूर्ति किए बिल जारी किए। एम्स के स्टोर में सामान के रसीद नहीं मिली। एम्स के कर्मचारियों ने बिना अधिकृत अधिकारियों के जानकारी दिए इसे मंजूरी दी। कंपनी के फर्जी बिलों के आधार पर मैसर्स स्नेह इंटरप्राइजेज कंपनी के खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए। कंपनी के मालकिन की संलिप्तता पाए जाने के बाद शुक्रवार को आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने कंपनी की मालकिन को गिरफ्तार कर लिया।