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डीटीसी के हालात: परिचालन कर्मियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, कम किये जाएंगे मुलाजिम

Mon, 11 Oct 2021 05:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

बसों की कम संख्या के बाद कर्मियों की संख्या भी सीमित करने की तैयारी चल रही है निगम में।
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डीटीसी बस
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विस्तार
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बसों की संख्या में कमी को देखते हुए दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने परिचालन से जुड़े कर्मियों की संख्या को सीमित करने की तैयारियां शुरू कर दी है। क्षेत्रीय और डिपो प्रबंधकों की ओर से चालक-परिचालकों की संख्या अधिक बताए जाने के बाद जरूरत के मुताबिक कर्मियों की संख्या तय करने को कहा गया है। इससे वित्तीय बोझ भी नहीं बढ़ेगा। इससे कर्मियों की चिंता बढ़ने के साथ राजनीति भी शुरू हो गई है।

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डीटीसी के बेड़े में पुरानी बसों की हालत खराब होने की वजह से सड़कों पर फिलहाल करीब 3300 बसें ही दौड़ रही हैं। डीटीसी के बेड़े में 3700 से अधिक बसें हैं। ऐसे में 400 बसों के कर्मियों को भविष्य की चिंता सताने लगी है। डीटीसी में फिलहाल पांच हजार से अधिक स्थायी चालक-परिचालक हैं जबकि कांट्रैक्ट के तहत काम करने वालों की संख्या 12 हजार के करीब है। इस निर्देश में परिचालन कर्मियों की संख्या को अधिक बताते हुए जरूरत के मुताबिक इनकी संख्या तय करने को कहा है। वित्तीय बोझ न बढ़े इसे देखते हुए प्रबंधकों को नए सिरे से कर्मियों की संख्या नियत करने को कहा है। सूत्रों का कहना है कि इसका असर कांट्रैक्ट कर्मियों पर पहले पड़ेगा। 

250 क्लस्टर बसों के कर्मियों के माथे पर शिकन
क्लस्टर के चार डिपो के परिचालन कर्मियों की सेवाएं भी 10 अक्तूबर तक के लिए  थी। दो दिन पहले कर्मियों ने नौकरी चले जाने की आशंका को देखते हुए रोष भी जताया था। कांट्रैक्ट की मियाद खत्म होने की वजह से ऐसा किया जा रहा है। उनकी सेवाओं पर विचार किया जा रहा है। उधर, डीटीसी की ओर से नए कंडक्टर और ड्राइवर की नियुक्ति भी की जा रही है। माना जा रहा है कि इस मसले पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा। 
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मामले में शुरू हुई राजनीति
जतिन आनंद ने ट्वीट कर कहा है कि डीटीसी में बसों की कम संख्या होने से चालक परिचालकों को नौकरी की चिंता सताने लगी है। इसपर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने भी ट्वीट किया है कि इंतजार अभी भी जारी है, झूठ भी। उन्होंने इसपर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रवीन शंकर कपूर ने आरोप लगाते हुए कहा कि इस सर्कुलर पर कहा है कि स्टाफ की संख्या में कटौती से यह लगने लगा है कि डीटीसी की हालत और खराब हो गई है। 

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