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दिल्ली : कई संक्रमितों में मिला मोनुपिराविर दवा का असर, सतर्कता के साथ देने की अपील 

Tue, 15 Feb 2022 05:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

हाल ही में दिल्ली सहित देश के पांच चिकित्सीय संस्थानों ने भी कोरोना मरीजों पर एक चिकित्सीय अध्ययन किया है, जिसके मुताबिक मोनुपिराविर दवा का असर पांच दिन में दिखाई देने लगता है, परंतु यह दवा हर मरीज को नहीं दी जा सकती है। इसके दुष्प्रभाव भी काफी गंभीर हो सकते हैं।
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demo pic - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण के उपचार में मोनुपिराविर दवा को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कई देशों में इस दवा को असरदार माना गया है, लेकिन भारत में इसे सतर्कता के साथ देने की अपील चिकित्सकों से की गई है।

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हाल ही में दिल्ली सहित देश के पांच चिकित्सीय संस्थानों ने भी कोरोना मरीजों पर एक चिकित्सीय अध्ययन किया है, जिसके मुताबिक मोनुपिराविर दवा का असर पांच दिन में दिखाई देने लगता है, परंतु यह दवा हर मरीज को नहीं दी जा सकती है। इसके दुष्प्रभाव भी काफी गंभीर हो सकते हैं।

हाल ही में नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने देशभर के चिकित्सकों से अपील करते हुए कहा था कि बीती लहर में दवाओं के अधिक इस्तेमाल की जानकारियां मिली थी, लेकिन इस बार सभी को यह ध्यान रखना है कि इन दवाओं के दुष्प्रभाव काफी अधिक हैं।
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लोगों को अपने अनुसार इनका सेवन नहीं करना है और प्रोटोकॉल का पालन करते हुए डॉक्टर इस दवा को दे सकते हैं। दिल्ली स्थित फोर्टिस सी-डीओसी के अलावा जीडी अस्पताल, जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और डायबिटीज फाउंडेशन ने मिलकर यह अध्ययन किया है। 1400 से अधिक कोरोना मरीजों पर हुए अध्ययन से पता चला है कि पांच दिन दवा देने के बाद वयस्क व गैर गर्भवती महिला, जो कोरोना संक्रमित हैं और जिन्होंने वैक्सीन की खुराक नहीं ली है, उनमें असर मिला है।

डॉक्टरों के अनुसार, यह नई और ओरल एंटी वायरल ड्रग है। इसे भारत समेत कई देशों ने आपात इस्तेमाल की अनुमति दी हुई है। फोर्टिस के वरिष्ठ डॉ. अनूप मिश्रा ने बताया कि मेडिकल जर्नल डायबिटीज एंड मैटाबोलिक सिंड्रोम: क्लीनिकल रिसर्च एंड रिव्यूज में प्रकाशित इस अध्ययन में दवा के प्रयोग से मरीज में भर्ती होने या मौत जैसे जोखिम को कम करने में मदद मिली है। उन्होंने बताया कि अध्ययन के दौरान कोरोना संक्रमण के 1433 मरीजों का चयन किया गया।   

पिछले वर्ष 15 अक्तूबर से इस वर्ष पांच जनवरी तक अध्ययन पूरा हुआ। इस दौरान यह पता चला कि कोरोना के नए वेरिएंट का असर उन लोगों में काफी है जिनका टीकाकरण पूरा नहीं हुआ है। ऐसे रोगियों में दवा का असर मिला है।

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