अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को विशेषज्ञों के साथ बच्चों व अभिभावकों से पैरेंटिंग इन द टाइम ऑफ कोराना विषय पर चर्चा की। सोशल मीडिया पर लाइव करीब 44 लाख बच्चों के सवालों के जवाब भी दिए। अभिभावकों की चिंता निजी स्कूलों की फीस व बच्चों की गर्मी की छुट्टियों को लेकर दिखी।
अभिभावकों के फीस से जुड़े सवाल पर केजरीवाल और सिसोदिया ने कहा कि निजी स्कूलों में फीस लेने पर रोक लगाना बेहद मुश्किल फैसला है। बच्चों की फीस से ही स्कूल प्रबंधन अपने शिक्षकों व स्कूल स्टाफ को फीस देते हैं। फीस लेने पर रोक लगाने से इन सब पर संकट खड़ा हो जाएगा। सिसोदिया ने बताया कि इसी वजह से इस बारे में दिल्ली सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है। हालांकि, उन्होंने अभिभावकों से सुझाव मांगा कि इस बारे में वह सरकार को इस तरह से सुझाव दें, जिससे शिक्षकों व स्कूल स्टाफ की जिंदगी संकट न पड़े। उन्होंने वादा भी किया कि बेहतर सुझावों पर सरकार विचार करेगी।
गर्मी की छुट्टी से जुड़े सवालों पर केजरीवाल ने कहा कि गर्मी में स्कूल चलाना मुश्किल रहता है। हालांकि, उन्होंने माना कि इस वक्त अप्रैल में चलने वाली कक्षाएं बंद हैं। इस बारे में सरकार ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है। यदि बच्चों व अभिभावकों के कोई सुझाव हों तो वह सरकार से साझा करें। उस पर विचार किया जाएगा।
अभिभावकों और छात्रों के कुछ सवाल
सोशल मीडिया पर अफवाह से कैसे बचें?
सोशल मीडिया पर बच्चे कम से कम वक्त दें। इसकी जगह वह पढ़ाई के साथ अपना वक्त घर पर बातचीत से गुजारें। अभिभावक बच्चों के लिए कुछ एक्टिविटी भी प्लान कर सकते हैं। लॉकडाउन के दौर में यह आसान भी है।
सवाल : हैपीनेस क्लासेज याद आ रही है?
हैपीनेस क्लासेज में बच्चे खूब आनंद उठाते थे। अभिभावकों को चाहिए कि वह घर पर क्लास जैसी एक्टिविटी करें। बच्चों के साथ मेडीटेशन करें, खेल-खेल में कहानियां सुनाएं, बच्चों से कहानी भी सुनें। बच्चों से हैपीनेस क्लास के बारे में जानकारी जुटाएं।
सवाल : घर पर ऊबन हो रही है, क्या करें?
इससे पहले देश ने ऐसा वक्त नहीं देखा है। ज्यादा समय बच्चों में बिताएं। ऐसा शेड्यूल बनाएं कि जिसमें खेल भी हो और पढ़ाई भी। इससे बच्चे घर पर खुश रह सकेंगे। बच्चों के साथ पेंटिंग व लेखन जैसे रचनात्मक कार्य भी किए जा सकते हैं।