-दीपिका को अनुचित व्यवहार के लिए प्रो. सुजीत कुमार से लिखित में माफी मांगनी होगी
-निलंबन के दौरान उन्हें डीयू से संबद्ध किसी भी कॉलेज परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी
-वह अपनी कक्षाओं में आ सकती हैं और परीक्षाएं देना जारी रख सकती हैं
-जांच समिति की ओर से उनके आचरण की समीक्षा के बाद उनका निलंबन रद्द कर दिया जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (डूसू) की संयुक्त सचिव दीपिका झा को दो माह के लिए निलंबित कर दिया गया है। उन पर डीयू के डॉ. बी. आर अंबेडकर कॉलेज में प्रो. सुजीत कुमार को थप्पड़ मारने के आरोप थे। इस मामले को लेकर छ: सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। समिति की सिफारिशों के आधार पर न केवल उन्हें निलंबित किया गया है बल्कि उन्हें प्रो. सुजीत कुमार से लिखित में माफी भी मांगनी होगी।
निलंबन के दौरान दीपिका को डीयू से संबद्ध किसी भी कॉलेज परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। इस तरह से उनके कॉलेज में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि वह अपनी कक्षाओं में आ सकती हैं और परीक्षाएं देना जारी रख सकती हैं। जांच समिति की ओर से उनके आचरण की समीक्षा के बाद उनका निलंबन रद् कर दिया जाएगा।
डीयू प्रॉक्टर की ओर से इस संबंध में एक आदेश जारी किया गया है। जिसमें कहा गया है कि सक्षम प्राधिकारी की ओर से अनुमोदित समिति की सिफारिशों के आधार पर दीपिका झा को तत्काल प्रभाव से दो माह के लिए डूसू संयुक्त सचिव पद से निलंबित किया गया है।
मालूम हो कि दीपिका झा पर आरोप थे कि उन्होंने प्रो. सुजीत कुमार को थप्पड़ मारा। इस मामले को लेकर एक जांच समिति बनाई गई थी। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही दीपिका पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
चूंकि डॉ बीआर आंबेडकर कॉलेज के प्रिंसिपल कार्यालय में प्रो सुजीत कुमार के साथ यह घटना घटी थी। ऐसे में इस घटना को गंभीरता से लेते हुए समिति का गठन किया था। समिति ने निष्कर्ष निकाला कि छात्रा और डूसू की पदाधिकारी के रूप में दीपिका झा का आचरण अस्वीकार्य और अनुचित है। ऐसी घटना अनुशासन और मर्यादा के गंभीर उल्लंघन को दर्शाती है।
इस मामले में दीपिका झा का आरोप था कि शिक्षक ने उन्हें धमकी दी थी और अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। उन्होंने शिक्षक पर शराब के नशे में होने का आरोप भी लगाया था। इस मामले पर एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने कहा है कि प्रो को थप्पड़ मारने पर कमेटी की ओर से सिर्फ दो महीने की सजा देना शर्मनाक है। डूसू पदाधिकारी ने अपने पद का खुला दुरुपयोग किया है, उन्हें पद से हटाने के साथ-साथ यूनिवर्सिटी से बर्खास्त किया जाना चाहिए। डीयू की जिम्मेदारी है कि प्रो सुजीत कुमार के सम्मान को सुनिश्चित करे।