नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सरगना किशन सिंह (39) को भारत लाने में कामयाब रही है। स्पेशल सेल की टीम रविवार रात को उसे दिल्ली ले आई। दिल्ली पुलिस को किशन सिंह को भारत लाने में दो वर्ष तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। आखिरकार यूके सरकार ने आरोपी किशन सिंह के प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी। फिलहाल आरोपी को सात दिन के लिए क्वारंटीन किया गया है। क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद स्पेशल सेल उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी।
स्पेशल सेल डीसीपी संजीव कुमार यादव के अनुसार, सेल ने 15 फरवरी, 2017 को ड्रग्स रैकेट का पर्दाफाश कर खिलाड़ी हरप्रीत सिंह, अमनदीप और हरनीश सरपाल को गिरफ्तार किया था। हरप्रीत सिंह ने ऑस्ट्रेलियन कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स-2004 में सिल्वर मेडल जीता था। इनके कब्जे से करीब 50 करोड़ रुपये की कीमत की 25.282 किलो पार्टी ड्रग्स ‘म्याऊं-म्याऊं’ बरामद की गई थी। यह ड्रग्स मुंबई और दिल्ली में आयोजित होने वाली रेव पार्टियों में बेची जानी थी। आरोपियों ने पूछताछ में बताया था कि वह मूलरूप से राजस्थान निवासी व लंदन में रह रहे किशन सिंह के लिए काम करते हैं। किशन एमबीए करने के बाद स्टूडेंट वीजा पर लंदन गया था। इसके बाद उसने यूके की नागरिकता ले ली थी। ये लोग मुंबई के एक सप्लायर से ड्रग्स लेते थे और फिर कोरियर एजेंट के जरिये लंदन भेजते थे। हरनीश ने बताया था कि उसकी लंदन में किशन से मुलाकात हुई। वह किशन के लाइफ स्टाइल से प्रभावित होकर ड्रग्स के गोरखधंधे में शामिल हो गया था, तभी से दिल्ली पुलिस उसे भारत लाने का प्रयास कर रही थी।
भारत में न्याय नहीं मिलने की गुहार लगाई थी
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा बुकी संजीव चावला को लंदन से प्रत्यर्पण कर भारत लाई थी। बुकी को जेल में रखा गया था। बाद में लंदन की अदालत के हस्तक्षेप के बाद संजीव चावला को जमानत दे दी गई थी, तब आरोपी किशन ने लंदन की अदालत में गुहार लगाई थी कि उसे भारत में न्याय नहीं मिलेगा, मगर लंदन कोर्ट ने उसकी अपील को खारिज कर दिया था।
वर्ष 2009 में लंदन गया था किशन
आरोपी किशन सिंह अपने परिवार को राजस्थान में छोड़कर वर्ष 2009 में लंदन चला गया था। वहां उसने शुरू में खिड़कियां बनाने का व्यवसाय शुरू किया। वर्ष 2015 में उसने ब्रिटिश नागरिकता ले ली। ड्रग्स अफ्रीका उपमहाद्वीप से मुंबई पहुंचती थी और वहां से लंदन जाती थी। लंदन के अलावा यूएई, यूएसए, मलयेशिया और मिडिल ईस्ट के देशों में सप्लाई की जाती थी। डीसीपी प्रमोद कुशवाहा की देखरेख में एसीपी संजय दत्त व इंस्पेक्टर अनुज कुमार की टीम उसे लेने लंदन गई थी।