सुरमेंद्र ने यहां तक कहा कि डॉक्टर भगवान का रुप होते हैं लेकिन इन्हीं डॉक्टरों ने अभी मरीजों को मरने के लिए छोड़ दिया है। सुरमेंद्र की तरह यूपी के बरेली से यहां पहुंचीं रामवती का कहना है कि हम बरेली से आए इलाज कराने के लिए दिल्ली आए थे। एम्स में जब पहुंचे तो एक महीने बाद आकर इलाज कराने की सलाह दी।
इसके बाद वे सफदरजंग अस्पताल आए तो यहां पूरे दिन अस्पताल में रहने के बाद भी उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं मिला। बार बार बोलने के बाद भी अस्पताल में कोई मरीजों की सुनवा करने वाला नहीं है। इसी दौरान सफदरजंग अस्पताल के वार्डों में खाली स्ट्रेचर की तस्वीरें भी बाहर आने लगीं। वार्ड में यहां पहले से भर्ती मरीज अब अस्पताल छोड़कर वापस जा रहे हैं।
दरअसल नीट पीजी काउंसलिंग में देरी के चलते रेजिडेंट डॉक्टर बीते शुक्रवार से हड़ताल पर हैं। फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की ओर से यह हड़ताल चल रही है। इसमें मुख्य तौर पर सफदरजंग अस्पताल के अलावा मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, हेल्थ यूनिवर्सिटी, भीमराव आंबेडकर मेडिकल कॉलेज इत्यादि के रेजिडेंट डॉक्टर शामिल हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के बाहर नुक्कड़ नाटक
राजधानी के अलग अलग मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों ने एकत्रित होकर सोमवार सुबह 11 बजे निर्माण भवन स्थित स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर बढ़े। यहां पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने सड़क किनारे दिन भर विरोध प्रदर्शन किया और इस बीच नुक्कड़ नाटक करते हुए यह भी संदेश दिया कि अगर डॉक्टरों के साथ सरकार सही व्यवहार नहीं करेगी तो वह मरीजों के लिए कैसे काम कर पाएंगें।
इस दौरान फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) के अध्यक्ष डॉ. मनीष ने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टर लंबे समय से नीट पीजी काउंसलिंग जल्द से जल्द कराने की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार उनकी मांगों पर कोई ध्यान ही नहीं दे रही है। महामारी में घंटों काम करने के बाद भी सरकार का डॉक्टरों के प्रति कोई सम्मान नहीं है। बार बार झूठ बोलकर आश्वासन देते हैं लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं है। इसलिए मांग पूरी होने तक हड़ताल इसी तरह जारी रहेगी।
देर रात एम्स में निकला कैंडल मार्च, डॉक्टरों ने की मांग
सोमवार देर रात दिल्ली एम्स परिसर में रेजिडेंट डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ कैंडल मार्च निकाला। रेजिडेंट डॉक्टरों ने परिसर में कैंडल मार्च करते हुए निदेशक कार्यालय के पास विरोध प्रदर्शन करते हुए नीट पीजी की काउंसलिंग जल्द से जल्द कराने की मांग की है। इन्होंने दूसरे अस्पतालों में चल रही डॉक्टरों की हड़ताल को समर्थन भी दिया है। हालांकि दिल्ली एम्स में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल नहीं है। यहां शुरूआत से ही काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।