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दिल्ली: हड़ताल पर रहे डॉक्टर, स्ट्रेचर लेकर दिन भर भटकते रहे मरीज, मुश्किल से मिल पा रहा इलाज, टले एक हजार ऑपरेशन

Sat, 04 Dec 2021 03:43 AM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) के बैनर तले हो रही इस हड़ताल में देर शाम घोषणा की गई है कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी तब तक रेजीडेंट डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे।
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इलाज के लिए भटकते मरीज। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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38 वर्षीय उषा देवी अन्य दिनों की तरह शुक्रवार सुबह जब ओपीडी पहुंचीं तो तीन घंटे लाइन में लगने के बाद उन्हें ओपीडी कार्ड मिल गया, लेकिन अंदर प्रवेश करने के कुछ देर बाद नारेबाजी करते हुए रेजीडेंट डॉक्टर ओपीडी पहुंचे और वहां उन्होंने हड़ताल होने की जानकारी दी। काफी देर तक इंतजार के बाद भी ऊषा देवी को उपचार नहीं मिल पाया। वह पिछले तीन दिन से बुखार ग्रस्त हैं और पहले से कैंसर रोगी भी हैं। रिठाला गांव निवासी ऊषा देवी महीने में कम से कम दो बार उपचार के लिए आरएमएल अस्पताल आती हैं।

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दरअसल राजधानी दिल्ली के सभी अस्पतालों में डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। शुक्रवार सुबह से ही अलग-अलग अस्पतालों में रेजीडेंट डॉक्टरों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नीट पीजी की काउंसलिंग जल्द से जल्द करवाने की मांग की है। फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) के बैनर तले हो रही इस हड़ताल में देर शाम घोषणा की गई है कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी तब तक रेजीडेंट डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे। इस हड़ताल की वजह से दिल्ली के 40 से अधिक केंद्र, निगम और दिल्ली सरकार के अस्पतालों में करीब एक हजार से अधिक ऑपरेशन टालने पड़े हैं। सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की छुट्टी रद्द कर दी गई है। साथ ही जो रेजीडेंट डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं आकर हड़ताल में शामिल हो रहे हैं उनके बारे में रोजाना जानकारी मांगी गई है।

हड़ताल को लेकर ‘अमर उजाला’ की टीम ने जब अलग अलग अस्पतालों की पड़ताल की तो लोकनायक, जीटीबी, डीडीयू, सफदरजंग, आरएमएल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में रेजीडेंट डॉक्टर कार्यरत नहीं थे। यहां वरिष्ठ डॉक्टर ही मरीजों का इलाज कर रहे थे लेकिन एक एक डॉक्टर के पास मरीजों की करीब 100 से अधिक संख्या होने के कारण ज्यादातर मरीजों को उपचार नहीं मिल पाया। कई अस्पतालों में देर शाम तक ओपीडी संचालित हुई है। जबकि सफदरजंग और लोकनायक अस्पताल में ओपीडी पूरी तरह से बाधित रही। इस हड़ताल में दिल्ली एम्स के रेजीडेंट डॉक्टरों ने भी समर्थन दिया है, लेकिन उन्होंने ओपीडी में सेवाएं नहीं देने पर सहमति नहीं जताई है। एम्स में सामान्य दिनों की तरह ओपीडी संचालित मिली। रेजीडेंट डॉक्टरों ने इस हड़ताल को पहले ही अपना समर्थन दे दिया था। इसकी वजह से दिल्ली के बड़े अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं। डॉक्टरों ने पहले ही साफ कर दिया था कि अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद रहेंगी और इसकी वजह से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
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स्ट्रेचर लेकर दिन भर करते रहे भागदौड़
डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मरीज को स्ट्रेचर पर लेकर तिमारदार अस्पतालों में भागदौड़ करते नजर आए। आरएमएल अस्पताल के परिसर में ऐसी तस्वीरें ज्यादा देखने को मिलीं, क्योंकि यहां ऑपरेशन थियेटर में पहुंचे मरीजों को भी वापस कर दिया गया। वहीं ओपीडी में दोपहर तक मरीजों को उपचार नहीं मिला, लेकिन उसके बाद शाम तक वरिष्ठ डॉक्टर ओपीडी में उपचार करते दिखाई दिए।

इन अस्पतालों में रही हड़ताल
सफदरजंग के अलावा, राम मनोहर लोहिया, लेडी हार्डिंग से जुड़े कलावती सरन अस्पताल, सुचेता कृपलानी अस्पताल और दिल्ली सरकार के लोकनायक, जीटीबी, अंबेडकर, संजय गांधी, दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल और इहबास अस्पताल समेत करीब 40 अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल देखने को मिली। हड़ताल की वजह से आपातकालीन सेवाएं प्रभावित नहीं रहीं। कई ऑपरेशन वरिष्ठ डॉक्टरों को आपातकालीन सेवाओं में करने पड़े। सफदरजंग अस्पताल में कई ऑपरेशन थियेटर बंद रहे। यहां इमरजेंसी में भी कुछ ही सर्जरी हुईं। अस्पताल में लगभग 80 से 100 सर्जरी रद्द हुई। दीन दयाल उपाध्याय में छोटी और बड़ी मिलाकर कुल 40 सर्जरी रद्द हुई। लेडी हार्डिंग के दोनों अस्पतालों में भी इतनी ही सर्जरी रद्द हुई। राम मनोहर लोहिया, अंबेडकर और जीटीबी अस्पताल में भी सर्जरी की सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई।

केवल 1127 मरीजों को मिला इलाज
लोकनायक अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टरों की वजह से सबसे ज्यादा ओपीडी सेवा प्रभावित हुआ। अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि औसतन रोज यहां पर चार हजार मरीज ओपीडी में आते हैं, लेकिन शुक्रवार को केवल 1127 मरीजों का ही इलाज हो पाया। उन्होंने कहा कि पुराने मरीजों का इलाज तो हुआ, लेकिन नए मरीजों का इलाज नहीं हो पाया। देर शाम सभी राज्यों के संगठन से चर्चा करने के बाद फोर्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनीष ने बताया कि रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल आगे भी जारी रहेगी। जब तक सरकार काउंसलिंग का दिन तय नहीं करती है तब तक डॉक्टर कार्य नहीं करेंगे।

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