कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट की गतिविधियों का पता लगाने के लिए दिल्ली के डॉक्टरों को बड़ी कामयाबी मिली है। डॉक्टरों ने दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों के सैंपल पर जब चिकित्सीय अध्ययन शुरू किया तो उन्हें ओमिक्रॉन वैरिएंट पकड़ में आया और सीक्वेंसिंग के दौरान डॉक्टरों ने इनमें 35 बार म्यूटेशन यानी वायरस की आनुवांशिक संरचना में 35 बार अलग अलग परिवर्तन देखने को मिले हैं।
मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव में प्रकाशित इस अध्ययन में बताया गया है कि डॉक्टरों ने देश में पहली बार नैनोपोर प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए अनुक्रमण रसायन शास्त्र पर कार्य किया है। इस प्रौद्योगिकी के जरिए इन्होंने ओमिक्रॉन वैरिएंट के प्रत्येक म्यूटेशन के बारे में न सिर्फ जानकारी एकत्रित की बल्कि यह किस तरह से मरीज के शरीर में असर डाल रहा है, इसके बारे में भी पता किया है।
साथ ही यह भी पता चला है कि ओमिक्रॉन के साथ अब डेल्टा वैरिएंट भी उपवर्गित होने लगा है जिसका मतलब यह है कि आगामी दिनों में दोनों ही वैरिएंट का असर दिल्ली में देखने को मिल सकता है।
चिकित्सीय वर्ग इस स्थिति को जोखिम भरा मान रहा है क्योंकि दिल्ली में अब कोरोना के दो गंभीर वैरिएंट आ चुके हैं जिनमें से एक डेल्टा जिसे अति गंभीर माना जाता है और दूसरा ओमिक्रॉन जिसे तेजी से फैलने की क्षमता से जोड़कर देखा जा रहा है। यह दोनों ही वैरिएंट जन स्वास्थ्य के लिहाज से उचित नहीं हैं।
तब डेल्टा में केवल तीन मिले थे म्यूटेशन
अध्ययन के अनुसार दिल्ली के सबसे बड़े कोविड केंद्र लोकनायक अस्पताल में भर्ती 13 रोगियों के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग के दौरान ओमिक्रॉन वैरिएंट की गतिविधियों के बारे में पता लगाया है। अस्पताल के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि इसी अध्ययन से यह पता चला है कि दिल्ली में डेल्टा के बाद अब ओमिक्रॉन सबसे अधिक फैला है। उन्होंने बताया कि पिछली बार जब डेल्टा वैरिएंट पर उन्होंने अध्ययन किया था तो उसमें केवल तीन बार परिवर्तन देखने को मिला लेकिन जैसा कि दूसरे देशों के वैज्ञानिकों ने पाया है, ओमिक्रॉन वैरिएंट में डेल्टा से कई गुना अधिक परिवर्तन हो रहे हैं। 35 परिवर्तन हमने इस अध्ययन में देखे हैं और यह सभी वायरस के दूसरे वैरिएंट की भांति मरीजों के शरीर पर असर डालता है।
40 से 44 वर्ष वालों में सबसे कम 19 म्यूटेशन मिले
डॉ. सुरेश ने बताया कि जिन 13 मरीजों पर यह अध्ययन हुआ है उनकी आयु 5 से लेकर 59 वर्ष के बीच थी। सबसे ज्यादा 15 से 19 साल की आयु की किशोरियों में ओमिक्रॉन के म्यूटेशन हुए। उन्होंने बताया कि इस आयु में एक ही मरीज में 30 म्यूटेशन देखने को मिले हैं। जबकि 40 से 44 वर्ष की आयु के मरीजों में केवल 19 म्यूटेशन ही मिले। इस अध्ययन में लोकनायक अस्पताल के अलावा मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, आईजीआईबी और केरल के अमृता स्कूल ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी का सहयोग भी लिया गया है।
उम्रवार वायरस के अलग अलग म्यूटेशन
. 5 से 9 साल के एक बच्चे में 27 म्यूटेशन पाए गए।
. 20 से 24 साल की दो किशोरियों में से एक में 27 और दूसरी में 18 म्यूटेशन मिले।
. 15 से 19 साल के दो किशोर में 30 और 24 म्यूटेशन मिले, जबकि किशोरी में 30 म्यूटेशन हुए।
. 35 से 39 साल के एक पुरुष में 25 और महिला में 19 म्यूटेशन मिले।
. 40 से 44 साल के एक पुरुष में 20 और 55 से 59 साल के एक पुरुष में 18 बार वायरस ने परिवर्तन किया।