बताया जा रहा है कि एक मई को उपराज्यपाल ने विशेष अधिकार का इस्तेमाल कर दोनों फाइल अपने पास मंगाई। उपराज्यपाल ने 15 मई को दिल्ली सरकार के पैनल को खारिज करते हुए दिल्ली पुलिस के पैनल को मंजूर कर लिया। इस पर 17 मई को दिल्ली के गृह मंत्री ने रिपोर्ट बनाई। इसमें उन्होंने कहा कि सरकारी वकील नियुक्ति का अधिकार दिल्ली पुलिस के पास नहीं है।
उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि यह काम दिल्ली सरकार का है। करीब 8 पेज के नोट में गृह मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान को बचाने के लिए ही एलजी चुनी हुई सरकार के जनहित से जुड़े निर्णय को अवलोकन के लिए राष्ट्रपति के पास भेजेंगे। अगर जनहित के मसले को खारिज करेंगे तो उसका कारण बताएंगे। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का 2016 और 2018 का आदेश है कि सरकारी वकील को सरकार नियुक्त करेगी।
सूत्रों का कहना है कि 21 मई को दिल्ली के गृह मंत्री ने उपराज्यपाल से मुलाकात कर इस मसले पर बात की। हालांकि, उपराज्यपाल ने 23 मई को कहा कि वह संविधान का पालन करेंगे। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर कैबिनेट की राय मांगी। इस मसले में बृहस्पतिवार को दिल्ली कैबिनेट की बैठक में गृह विभाग के पैनल को मंजूर कर लिया गया। जल्द ही इसकी फाइल उपराज्यपाल को भेजी जाएगी।