नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा स्पा में पुरुषों की मालिश महिला से करवाने एवं महिला की मालिश पुरुषों से करवाने संबंधी निर्देश को चुनौती याचिका पर फिलहाल नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा यह नीतिगत मामला है। याचिका पर 20 सितंबर को सुनवाई की जाएगी। इस बाबत एसोसिएशन ऑफ वैलनेस आयुर्वेदिक एंड स्पा ने याचिका दाखिल की है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने याचिकाकर्ता एसोसिएशन से कहा कि वह अपने सदस्यों के नाम एवं इस नियम के तहत अगर किसी स्पा वाले के खिलाफ कार्रवाई हुई है तो इसकी जानकारी दें।
दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि यह निर्णय उपराज्यपाल की ओर से गठित टास्क फोर्स ने लिया है। उन्होंने कहा इस निर्णय की कोई कानूनी मान्यता नहीं है और ना ही इस बाबत कोई अधिसूचना जारी की गई है। उन्होंने कहा कि अभी तक कानून नहीं बना है तो यह आंतरिक दस्तावेज है और उसे लागू नहीं किया जा सकता है।
टास्क फोर्स का गठन दिल्ली महिला आयोग के पत्र के आधार पर किया गया था। अदालत ने उनका तर्क सुनने के बाद कहा कि यदि यह निर्देश है तो उसे चुनौती दी जा सकती है। एमसीडी के वकील ने याचिकाकर्ता के अधिकार पर सवाल उठाया और कहा कि जिसके पास लाइसेंस है वह स्पा चला सकता है।
वहीं याचिकाकर्ता ने इस तरह के प्रतिबंध को गैर कानूनी कहा है और उसे निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस दिशानिर्देश की कोई कानूनी मान्यता नहीं है। उसके बावजूद दो स्पा के खिलाफ कार्रवाई की गई है और उसे बंद कर दिया गया है। अन्य स्पा को चेतावनी दी गई है। उन्होंने कहा कि हर एक कार्य स्थल या व्यवसाय में अच्छे बुरे लोग होते हैं।
याची ने कहा अगर पुरुष और स्त्री एक दूसरे की मालिश करतेे हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि स्पा में वेश्यावृत्ति होती है। साथ ही यह परंपरागत पेशा है और इस पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। इस तरह से रोक लगाया जाना भेदभावपूर्ण है। महिलाओं और पुरुषों के बीच भेदभाव करने जैसा है।