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एयर सुविधा एप : अनिवार्य ऑनलाइन स्व-घोषणा फॉर्म को हटाने की मांग

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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र और डीजीसीए से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें एयर सुविधा एप के तहत प्रदान किए गए अनिवार्य ऑनलाइन स्व-घोषणा फॉर्म को हटाने की मांग की गई है। जिसे यात्रियों को उड़ान भरने से पहले कोविड-19 निगेटिव के साथ भरना होता है। अदालत ने मामले की सुनवाई 23 दिसंबर तय की है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और ज्योति सिंह की पीठ ने याचिका पर उड्डयन मंत्रालय, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और एयर इंडिया लिमिटेड को याचिका अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। याची ने कहा स्व-घोषणा फॉर्म के लिए प्रौद्योगिकी और एक स्मार्टफोन के ज्ञान की आवश्यकता होती है। इसके अलावा सीट नंबर भी कई यात्रियों के पास नहीं होता।
यह याचिका वकील सुमिता कपिल ने दायर की है। याची की ओर से पेश अधिवक्ता शान मोहन ने विभिन्न यात्रियों के उदाहरण दिए जो विदेश से भारत के लिए उड़ान में सवार नहीं हो पाए क्योंकि वे स्मार्टफोन पर अपने फॉर्म भरने में असमर्थ थे। इस कारण टिकट और निगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट होने के बावजूद उन्हें ऑनलाइन जमा नहीं कर सकते थे। इसके बाद यात्रियों को ट्रेवल एजेंट से फॉर्म भरकर दूसरी फ्लाइट बुक करानी पड़ी, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ।
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याची ने कहा स्व-घोषणा फॉर्म को यह घोषित करते हुए देना होगा कि यात्री कोरोना निगेटिव है जो आरटीपीसीआर परीक्षण रिपोर्ट में स्पष्ट है जिसे हवाई अड्डों पर चेक-इन करने से पहले पेश किया जाता है। याची ने कहा उस रिपोर्ट पर पासपोर्ट नंबर भी है।
याचिका में कहा गया है कि पासपोर्ट और कोविड परीक्षण रिपोर्ट की फोटो वाले फॉर्म को काउंटर पर क्यों पेश किया जाना चाहिए और ऑनलाइन जमा किया जाना चाहिए, जबकि फिजिकल प्रतियों को बहुत अच्छी तरह से ट्रैक किया जा सकता है और संबंधित अधिकारियों को पोस्ट किया जा सकता है।
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